प्रश्नोत्तर P8-0097 · भाग 8
क्या मौन भी रास्ता है?
कुछ लेकर, समझकर मौन हो, तब तो रास्ता है। लेकिन अगर आपने समझा ही नहीं, तो मौन का क्या मतलब? पागल की तरह मौन रख लो, उस मौन का कोई मतलब नहीं होगा। अगर आपने सीखा ही नहीं कि कैसे करना है, तो उस मौन का क्या मतलब? कोई मतलब थोड़ी है। देखोगे तो गूंगा तो जिंदगी भर मौन है। कुछ हुआ क्या? मौन का मतलब समझ के मौन हो जाना, और फिर आंतरिक करते रहना, निर्विचार होना।
हां, निर्विकार होना। निर्विचार कभी नहीं हो सकते। जब तक यह शरीर है, तब तक कुछ चाहिए, और कुछ चाहिए तो विचार आएंगे। तो निर्विचार कभी नहीं हो सकते। निर्विकार हो सकते हो, निर्विचार नहीं हो सकते। अब आप एक बात बताओ। जितने भी महापुरुष हुए, उन्होंने किसी के लिए भोजन मांगा या नहीं? अपने लिए मांगा न। तो भोजन का, भूख का विचार आया तभी मांगा। क्या निर्विचार हुए? क्या निर्विकार हुए? आप यह समझिए। आजकल निर्विचार कराने का भी धंधा खूब तेजी से चला है, फल-फूल रहा है। अच्छा धंधा उसी का चलता है जो नहीं होगा। जो होगा उसका धंधा नहीं किया जा सकता। जो नहीं होगा, धंधा उसी का चलता है, क्योंकि कभी होगा ही नहीं, धंधा चलता रहेगा।
मन को लेकर लोगों ने हजारों साल से गुलाम बनाया है लोगों को। और मन शरीर के लिए काम करता है। चल ही रहा है। आप सोचो, अभी भी चल रहा है। तो मैंने यह देखा कि धंधा उसी का चलता है जिसे पता है वह कभी होगा ही नहीं। उसी का धंधा चलेगा। होगा तो धंधा क्या चलेगा? थोड़ी देर के लिए निर्विचार होगा। निर्विचार तब होगा जब आपको कुछ नहीं चाहिए। तो वह स्थिति कुछ देर के लिए बनेगी। लेकिन जब शरीर के लिए चाहिए, तो विचार आएंगे। लेकिन मैं आपको बताऊं, निर्विचार कभी हुआ ही नहीं जा सकता। कभी नहीं हुआ जा सकता। निर्विकार हुआ जा सकता। तो हमें समझ-समझ के यात्रा करनी है।
निर्विषय। निर्विषय मतलब प्रवृत्ति से निवृत्ति। प्रवृत्ति से मुक्त हो सकते हो। अपने तरीके से पाने की इच्छा का त्याग कर दो, प्रवृत्ति से मुक्त हो जाओगे। विषय को खत्म किया जा सकता है। अब आप कौन से विषय में फंसे हो? बेईमानी से अपने आप को छुड़ा सकते हो। किस विषय में फंसे हो? उससे मुक्त किया जा सकता है अपने आप को।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 26 अप्रैल 2026 #योगी · 2026-04-26