प्रश्नोत्तर P8-0084 · भाग 8
संप्रदाय का नाम क्या है? आपके गुरुदेव कौन हैं? कृपया बताइए।
देखिए, मैंने उदासीन संप्रदाय के बड़े अखाड़े से दीक्षा ली थी। लेकिन अब मैं संप्रदाय से भी मुक्त हो गया। क्योंकि जिसे हमने गुरु बनाया था, वे महंत थे, श्री पूनम दास जी महाराज। तो उन्होंने हमको बोल दिया कि जो तुझे चाहिए मैं नहीं दे सकता, तू जा खोज। तो मैं वहां से निकल गया। फिर भी मैं उनके पास बारह साल तक जाता ही रहा। उन्होंने ना बोलने के बाद भी मैं आश्रम जाता रहा, और मुझे बारह साल के अंदर ही ज्ञान हुआ। दो हजार ग्यारह में निकला था, ज्ञान की खोज में। दो हजार बीस में ज्ञान हुआ, और मेरे बारह साल दो हजार तेईस में पूरे हुए।
मुझे इतना पता था कि किसी भी खोजी को बारह साल तक कुटिया कभी नहीं बनाना चाहिए। तो मैंने बारह साल तक कोई कुटिया नहीं बनाई थी। बस भ्रमण ही करता रहा। और जब बारह साल मेरे पूरे हुए, तेईस में, तो चौबीस में, दो हजार चौबीस में, मैंने यहां अपनों की कुटिया का निर्माण आप लोगों के लिए किया। इसलिए कि मैं पच्चीस-छब्बीस साल में निकला था। जब व्यक्ति पच्चीस-छब्बीस साल में निकल गया और बारह साल भ्रमण कर लिया, कोई घर नहीं बनाया, तो फिर उसे घर की कोई जरूरत ही नहीं है। क्योंकि मुख्य जरूरत, शौक, श्रृंगार और घर, सबकी जरूरत पच्चीस-छब्बीस साल की जवानी में ही पड़ती है। तो मैंने उस समय घर ही नहीं बनाया, बस ऐसे भटकता ही रहा, घूमता ही रहा। तो मुझे जरूरत नहीं थी।
लेकिन मैंने देखा कि लोग मुझसे मिलना चाहते हैं, लोग मेरे पास आना चाहते हैं। तो लोग मेरे पास आते थे, बाहर मिलते थे। लेकिन बाहर इतना एकांत का माहौल नहीं होता था। कोई डिस्टर्ब करता था। दूसरे के यहां आते थे, फिर उन्हें एक-दो दिन में जाना पड़ता था, और सही सत्संग नहीं हो पाता था। तो मैं यह सब देखते हुए अपनों की कुटिया का निर्माण किया। और आज यहां एकांत ऐसा है कि यहां कोई बोलने वाला नहीं है। चाहे जितना चिल्लाकर बोलो, चाहे जब तक सत्संग करो, चाहे जब तक बैठो, कोई पूछने वाला नहीं है कि तुम क्यों बैठे हो, क्या कर रहे हो। तो मैंने साधकों के लिए ऐसे अपनों की कुटिया का निर्माण कर दिया कि आप आराम से आकर यहां साधना कर सकते हो।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 26 अप्रैल 2026 #योगी · 2026-04-26