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प्रश्नोत्तर P7-0190 · भाग 7

चंडीगढ़ से एक साधक चार-पाँच महीने से ईमानदारी और सत्कर्म सुनकर प्रभावित होकर आया। कहता है कि सभी बताते हैं, पर आप इस पर अलग से जोर देते हैं, इसलिए हृदय में बैठ गया कि इसे अपनाना ही चाहिए। अभी से शुरू किया है। सुबह की सैर में रोज़ दस-बीस रुपये के कुत्तों को खिलाता है। सैर के बाद घर से बाहर नहीं निकलता, इसलिए मनुष्य कम मिलता है, मिल जाए तो उसकी भी सेवा करता है। ईमानदारी कैसे पूरी तरह अपनाएँ, और सत्कर्म किसे-किसे करें?

चार-पाँच महीने में आपने सुना। मैं बहुत सीधी बात करता हूं। जवाब हां या ना में। आपने ईमानदारी पूरी तरह अपना ली, हां या ना? बस बात खत्म। कब से अपनाया? अभी से शुरू हुआ था। भाई, ये तो अपनाना ही चाहिए। इसको मां-बाप भी कहते हैं। सभी कहते हैं। कहते तो हैं। लेकिन ये जो कहा, इन्होंने अलग से कहा, तो इसको तभी से हो गया हृदय में कि इसको अपना ही चाहिए। तभी इससे उद्धार होगा। और सत्कर्म। जरूरतमंद की सेवा वगैरह करते हो। चलो। उसी दिन से दस-बीस रुपये रोज कुत्तों को। मैं सैर करने जाता हूं, तो वो कुत्तों को खिलाता हुआ चला जाता। कुत्तों को खिलाओ। अगर इंसान भी मिल जाए भूखा तो उनको भी खिलाना। कोई भी जीव मिल जाए। ऐसा नहीं कि कुत्ते ही। क्या होता है, लोग एक समूह पकड़ लेते हैं। समूह मत पकड़ो। अगर करो तो सबके लिए करो, नहीं तो राग-द्वेष पैदा हो जाएगा। बात ऐसी है कि सुबह सैर करने के बाद घर से बाहर नहीं निकलता, कोई काम पड़ता नहीं, तो मनुष्य की कमी हो जाती है। अगर कोई मिल गया तो उसको करता हूं। एकदम जरूर करिए। कहीं मौका मिल जाता है तो उसको करो।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 19 अप्रैल 2026, इस वक्त इस दुनिया में सबसे कठिन कार्य क्या है ? #योगी · 2026-04-19