प्रश्नोत्तर P7-0163 · भाग 7
एक बार गुरु मिल जाए, तो रुक ही जाना चाहिए क्या? श्रीलंका में आपने कहा था कि ईमानदारी, सत्कर्म, सत्संग, और भ्रमण भी जरूरी है। क्या भ्रमण करना जरूरी है? भ्रमण की इच्छा घुटन से होने लगती है, कुछ समझ में नहीं आता।
बस रुक जाओ। भ्रमण अगर तेरे अंदर लालसा है, तो भ्रमण तो कर ही रहे हो। जब से हम पैदा हुए हैं, क्या भ्रमण नहीं कर रहे? भ्रमण हम किस लिए करते हैं? जब हमारे प्रश्न होते हैं। जहां हमारे जवाब मिल जाएं, वहीं रुक जाएंगे। जैसे भूख लगी, तो भोजन कब तक ढूंढना है? जब तक भोजन ना मिल जाए। भोजन मिलने के बाद तो सो जाना है, विश्राम करना है। अगर मेरे जवाब नहीं मिल रहे, तो आगे निकल जाना चाहिए।
मैंने इससे कहा था, भ्रमण करना है तो कर ले। घूमने की, भ्रमण करने की इच्छा हो, कि हम यहां नहीं समझ पा रहे, हम वहां जाएंगे, समझ लेंगे। जाकर देख लो। लेकिन वहां जाओगे, तो आपका समय भी जाएगा। ऐसा नहीं है कि कुछ नहीं जाता। इस मार्ग में बहुत सोच-समझ के चलना है।
घुटन क्यों हो रही है, वह देखो। आकर्षण है। कुछ समझ में आता है, तो बस खत्म करो। जब कुछ नहीं है, तो ठीक है।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 12 अप्रैल 2026, अपनों की कुटिया में सत्संग समझो #योगी · 2026-04-12