आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P7-0147 · भाग 7

गुरबानी कहती है कि अगर परमात्मा बीच में खड़ा है, तो सेवक का कुछ नहीं होने देगा, चाहे दुनिया कुछ भी करे। तो क्या विरोध की जरूरत नहीं? गुरु अर्जुन देव जी को जहांगीर ने तवे पर बिठा दिया, ऊपर से रेत डाली गई, उन्होंने विरोध नहीं किया। संत को प्रेम से रहना चाहिए, या गलत का विरोध करना चाहिए? और जो मिस्त्री था, वह नशे में भी था।

इन्हीं बातों पर ना अपना देश गुलाम बन गया। मंदिरों को लूट के चले गए, और लोग ऐसे खड़े रह गए। क्यों? वो भगवान उठ के मंदिर से सबको मार नहीं दिया। अंग्रेजों से कौन छुड़ाया? कोई देवी-देवता आया था? तैंतीस करोड़ देवी-देवता आए थे क्या? मंदिरों को लूटा गया, देवदासियों के साथ कितने लोगों पर दुष्कर्म हुआ। कौन देवता निकला मंदिर से? इस धरती का राक्षस भी मनुष्य है, देवता भी मनुष्य है, और महापुरुष भी मनुष्य है। अच्छा बताओ, बचाना चाहिए कि नहीं बचाना चाहिए? सब सेवक तो थे। सब ऐसे लाइन से मारे गए। क्या हो गया? इतिहास में है ना? जब बाबर ने हमला किया था, गुरु नानक देव जी उस समय थे। गुरु नानक देव जी ने प्रेम भाव से कोई विरोध नहीं किया। उन्होंने देखा, हमला हुआ। मर्दाना जी साथ थे। लोग मारे गए। वहां गुरबानी भी कही गई है। लेकिन उनका कहना यह था कि जो हुआ है, करता करने वाला है। यह होना ही था, तो यह होना था। जब यह होना है, तो सामने वाले का भी करना होना है ना? एक तरफ का होना है, तो जो अपने बचाने के लिए प्रयास कर रहा है, जो मार रहा है, वह भी तो होना है। एक का होना है और दूसरे का नहीं होना है, ऐसा नहीं। जब होना है, तो सब होना है। संतों के हिसाब से शायद नहीं होना चाहिए, क्योंकि संत प्रेम से भरे होते हैं, वे क्यों उतरेंगे। तो जाओ, ऐसे संत ढूंढो। मैं ऐसा नहीं हूं। मैं तो बड़ा खतरनाक हूं। राम को गुस्सा नहीं करना पड़ा? कृष्ण को कितनों को मारना पड़ा? कृष्ण संत नहीं थे क्या? योगी नहीं थे? उन्होंने कितनों को मार दिया? अर्जुन ने कितनों को मार दिया? अर्जुन ज्ञानी नहीं थे? गुरु गोविंद सिंह जी ने भी मारा। उन्होंने क्यों मार दिया? फिर वे संत नहीं थे क्या? संत किसे कहते हैं, पता है? गलत होने पर उसका विरोध करे, और उस गलत को हटाए, उसके लिए लड़े, वो संत है। कपड़ा पहनने से, दाढ़ी रखने से, बाल रखने से कोई संत नहीं हो जाता। कर्म संत का होना चाहिए। संत का मतलब है किसी को बचाए, किसी की आत्मिक उन्नति करे, किसी कमजोर की सहायता करे। ऐसा नहीं कि गलत हो रहा है और ऐसे पड़ा रहे, और उसे संत कह दो। तो आपके हिसाब से फिर गुरु गोविंद सिंह या कृष्ण भगवान संत नहीं थे क्या? जरा अपनी समझ का उपयोग करो। किसी ने कुछ कहा है, तो किस स्थिति में कहा है, वह देखो। कब कहा है, क्यों कहा है। देश, काल, स्थिति, परिस्थिति अलग होती है। ऐसे वाणी पकड़ कर, जैसे आपने कहा कि बस प्रेम से हो जाना चाहिए। इसे नपुंसकता कहते हैं। और इसी से हमारा देश गुलाम हो जाता है। कि भैया, प्रेम से होगा, कुछ बोलो मत। दूसरा आया, क्या-क्या कर्म करके चला जाता है, और हम देखते रहते हैं कि हमें तो प्रेम से जीना है। हमें तो यही सिखाया गया है, अहिंसा, अहिंसा परमो धर्म। नहीं भाई। अहिंसा परमो धर्म का मतलब है हिंसा नहीं करनी है। लेकिन अगर मेरे ऊपर भी कोई हिंसा कर रहा है, तो उसे रोकना है। आत्मरक्षा। और उस आत्मरक्षा में उसे मार भी देना है। अगर वह बातों से मान गया, तो ठीक है। नहीं माना, तो उसे मार देना है, क्योंकि आत्मरक्षा सर्वोपरि है। गुरु अर्जुन देव जी ने क्या किया, क्या नहीं किया, वह छोड़ दो। अब मेरा इतना समय बर्बाद मत करो। मैं तो कल जाने वाला था, इसलिए आया। यह सब जाकर किसी सिख गुरु से पूछो। वे आपको बहुत अच्छे से समझा देंगे। आप पंजाब चले जाओ। वहां सिख गुरु बहुत हैं। जाकर उनसे पूरा पूछो कि उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया, क्यों किया। वे सारी बात बताएंगे। अगर मैं उनके बारे में बताऊंगा, तो मैं क्या बताऊंगा? मुझसे अपने बारे में पूछो। मेरे बारे में पूछो। इस आश्रम के बारे में पूछो, इस कुटिया के बारे में पूछो। और अगर आपको उन सब के बारे में जानकारी चाहिए, तो पंजाब चले जाओ, और खूब जानकारी लो। वहां सिख गुरु खूब हैं, आपको अच्छे से समझा देंगे। मैंने अभी कुछ देर पहले इसीलिए यह बात समझाई, क्योंकि उसका कोई मतलब भी नहीं है। वे किस स्थिति में थे, उन्हें क्या करना था, कि वे चुप रहे, जवाब नहीं दिया। वह तो वही बता सकते हैं, या उनके लोग बता सकते हैं, क्या परिस्थिति रही होगी। जैसे कृष्ण भगवान ने बहुत लोगों को मारा, लेकिन एक जगह भाग भी गए। भाग किस लिए गए? क्योंकि उनको शाप था, मार सकते नहीं थे। तो वे वहां गए, फिर वह जल उठा। किस स्थिति में उन्होंने नहीं बोला होगा। देश, काल, स्थिति, परिस्थिति अलग है। लेकिन अपने को इतना समझना है, कि गलत करना नहीं है, और गलत सहना नहीं है। हमारे लोग जितने भी हैं, हम जिसके पास गए, या हमारे पास कोई आया है, तो उसकी रक्षा करना ही संतता है। संत को यह मत समझ लेना कि दाढ़ी बढ़ गई, बाल बढ़ गए, कहीं कुटिया बना ली। ऐसे बहुत भगोड़े रह रहे हैं। मैं बारह साल पागल की तरह घूमा। ऐसे कितने भगोड़े कुटिया बना के रह रहे हैं, खा-पी के पड़े हैं। उनको कोई मतलब नहीं। उनसे पूछो, जीवन का उद्देश्य क्या है? बस भजन। भजन क्या है? बस हरि नाम। खा-पी के पड़े रहो, राम-राम करते रहो। ऐसे भगोड़े लाखों की संख्या में हैं। मैं बारह साल घूम के यही देखा। आप घूमो, भ्रमण करो, तब पता चलेगा। और जब काम करना है, तो काम सिर्फ प्रेम से नहीं होता। काम के लिए सब कुछ करना पड़ता है। जब किसी काम को परिणाम तक ले जाना है, जब किसी पौधे को वृक्ष तक ले जाना है, तो पता नहीं उस वृक्ष तक पहुंचाने में कितने जीवों की हत्या करनी पड़ेगी। किसान लोग किसानी करते हो? फसल में कितने जीव की हत्या होती है? फसल क्यों डालते हो? उपदेश फसल पाने का है, कीट मारने का नहीं। लेकिन मार तो रहे हो। किस लिए मार रहे हो? कीड़े को कीड़े के लिए मार रहे हो? नहीं, फसल के लिए। वैसे ही जब कोई काम करोगे, तो लड़ाई-झगड़ा सब करना पड़ेगा। अगर कोई फसल नहीं बोता, तो क्या उसे जीव मारने की जरूरत है? नहीं। लेकिन अगर कोई किसान है, और आप उससे कहो कि फसल में कीड़े क्यों मारते हो, तो वह क्या करेगा? कीड़े लग गए और मारे नहीं, तो क्या करे? फसल बिगड़ जाए, बर्बाद हो जाए। उसे स्प्रे मारना ही पड़ेगा। नहीं तो वो मरे, उसका परिवार मरे। फसल उसकी है। उसने अपने लिए लगाई है, कीड़ों के लिए थोड़ी लगाई है। और जो किसान नहीं है, कुछ नहीं बोता, वह रास्ते से निकलते हुए गालियां देता है, देखो यह कितने जीवों की हत्या कर रहा है। लेकिन तुम्हें क्या मालूम? तू उस जगह होता, तो तू भी यही करता। आप उस जगह पर होकर देखो, करके देखो। तब समझ में आएगा कि करना क्या होता है। मैं कहीं दूर से देख रहा हूं। ना उसके भाव को समझ पा रहा हूं, ना उसके उद्देश्य को समझ पा रहा हूं। वह नशे में था, यह बात छोड़ो। वह क्या था, क्या नहीं था, छोड़ो। आप जब उस जगह पर होगे, तब समझ में आएगा कि क्या होता है। वह वहां है, मैं यहां हूं। अंदर से भी, बाहर से भी, तब वह गलत लग रहा है। जरा वहां जाओ, तब समझ में आएगा कि किस तरीके से क्या काम करना पड़ता है। और पाओगे कि यह तो बहुत सही है। किसी काम को परिणाम तक ले जाना इतना आसान नहीं है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 12 अप्रैल 2026, अपनों की कुटिया में सत्संग समझो #योगी · 2026-04-12