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प्रश्नोत्तर P7-0106 · भाग 7

लक्ष्मण पूछते हैं, गुरु जी, माया से कैसे निकलें?

पहले माया को समझना है कि माया क्या है। एक प्रभु की माया है। उसमें आनंद है। एक आपकी माया है, जो बेईमानी और दुष्कर्म से तैयार हुई है। उसमें दुख है। तो एक काम करो। ईमानदारी और सत्कर्म अपना लो, निकल जाओगे। बेईमानी सबसे ज्यादा कहां होती है, पता है? बोलचाल में। बोलचाल में सबसे ज्यादा बेईमानी होती है। मान के चक्कर में आकर हम अपनों के साथ भी दिखावा करते हैं। परिवार में ही अपना मैं खड़ा करने के लिए बोलते हैं। परिवार में मैं क्यों खड़ा कर रहे हो? परिवार में भी यह कि मैं तुमसे ज्यादा जानता हूं। जानते हो तो उसे बताओ। ऐसा कुछ करो कि वह तुमसे ज्यादा जानने लगे। तब आपकी महानता है। यहां सब मालिक बनने के चक्कर में परेशान हैं। सब टैलेंटेड बनने के चक्कर में परेशान हैं। सब बड़ा बनने के चक्कर में परेशान हैं। और तो छोड़ो, परिवार में ही अपनी समझदारी दिखा रहे हैं। समझदारी का जीवन में तब महत्व है, जब आपकी समझदारी से किसी का स्तर उठे। किसी का स्तर गिर रहा है, तो उस समझदारी का क्या मतलब है? कोई मतलब नहीं। आपकी समझदारी का मतलब तब है जब उससे किसी का स्तर उठे। पता चला कि आपकी समझदारी से कोई नीचे गिर रहा है, तो उस समझदारी का क्या मतलब रहा? कोई मतलब नहीं। ऐसी समझदारी किस काम की?

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वीडियो: भाग्य कौन तय करता हैं प्रारब्ध या कर्म ? Aadhyatmik Pratyasth Gyan Yogi · 2025-07-03