प्रश्नोत्तर P7-0063 · भाग 7
कोई कह रहा था कि आपके पास जाने से भटक जाओगे, कुछ नहीं मिलेगा, फालतू में जा रहे हो। पाइपलाइन के विवाद और गालियों की बात भी हुई। लाइव में गालियाँ मिलती हैं, क्या करें? क्या उसकी बात सही थी?
यहाँ एक विवाद हुआ था, पाइपलाइन का। मेरे ऊपर केस भी किए थे। कुछ हुआ नहीं। यहाँ सबको पता है, सबको मालूम है। उस विषय में बोलने से क्या फर्क पड़ता है।
एक नया आया। हफ्ता सत्संग सुना है आपका, उतना नहीं समझ पाया, चला गया। चला वापस तो चला जाए ना। क्या फर्क पड़ेगा मुझे उसका यहाँ आने से और वापस चला जाने से। अपनी समस्या लेकर आएगा तो आएगा। रास्ते से ही चला गया, यहाँ से नहीं। समझ नहीं पाया, तो चला जाए। आपने सत्संग सुने हैं, और देखो, उसने आपको भी छोड़ा। इतना कम है उसका छोड़ना कि असर नहीं पड़ रहा। अपना बस यह पचना है।
उसने सही कहा। अभी हमारा कितना विरोध होगा। इतिहास में एक व्यक्ति आया और इधर-उधर की बात को खत्म कर दिया। अभी मुझे कितनी गालियाँ मिलेंगी, आपको पता है। सारी विधियों को, मन को, सबको कहा जा रहा है। आज तक दुनिया ने चिल्ला-चिल्ला के बोला है, हजारों साल से, मन को बस में करो। एक आदमी आया, खत्म कर दिया। ध्यान करो, इसको भी खत्म किया। बोल रहा हूँ, कोई ध्यान की जरूरत नहीं है, कोई ध्यान नहीं करना। अब गाली नहीं मिलेगी तो क्या मिलेगी।
तो यह बात उसने सही कही, कि वहाँ जाकर आपको कुछ नहीं मिलेगा। यह बात उसने सही कही। यहाँ आकर आपको कुछ नहीं मिलने वाला। यही तो बात है। इसलिए तो मैं लाइव में खुद कहता हूँ, जिसे कुछ चाहिए वह मत आना। रास्ते में उसने कह दिया, कुछ चाहिए तो मत जाना उसके पास। यह सही बात है।
इधर का एक आदमी, जब मैं जाता हूँ तो रास्ता बदल देते हैं, कि पकड़ के ज्ञान ही देगा। ईमानदारी और सत्कर्म मेन है। मैं लोगों को यही कहता हूँ। लेकिन अगर मैंने उन्हें देख लिया, वे मुझे देख लें, तब रास्ता नहीं बचता। तब आएँगे। और फिर मैं पकड़ के समझाऊँगा। क्या बोल रहा था। बस यही।
सब सही बोल रहा है। सब अपनी-अपनी जगह सही हैं।
लाइव में गालियाँ देते हैं। तो छोड़ो। लाइव कभी, वीडियो देखते हो नहीं। गाली आती है, क्या करें। समाज में तीन प्रवृत्ति हैं। देव प्रवृत्ति, राक्षस प्रवृत्ति, मानव प्रवृत्ति। आप कुछ भी करोगे, गाली तो सुनोगे। या तो आप कुछ मत करो। मन-बुद्धि के हो जाओ, पागल हो जाओ, तब कोई गाली नहीं देगा। अभी तो हमको कितनी गालियाँ मिलने वाली हैं, पता है। ध्यान वाले कहेंगे, देखो क्या कर रहा है। पहले कहता था ध्यान करो, अब कह रहा है ध्यान मत करो। फिर कितनी गालियाँ मुझे मिलने वाली हैं, पता है। बहुत। समझ गए तो थोड़ी देंगे। मैं जिन लोगों की बात कर रहा हूँ, जो एक-दूसरे को भटका रहे हैं, व्यापार कर रहे हैं, उनकी बात कर रहा हूँ। और मुझे तो इसका कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं तब भी हँसता था, अब भी हँस रहा हूँ, और आगे भी हँसता ही रहूँगा। यही तो मेरी जिंदगी है। हँसना मैंने छोड़ा नहीं।
इस इलाके में दो हजार उन्नीस से घूम रहा हूँ। फिर भी उसने आपको छोड़ा, तो कहाँ तक छोड़ा। उसका साथ छोड़ दिया। वहाँ एक व्यक्ति था, उससे भी मिला, बात करने लगा। कहीं भड़काया कि हमें ले ना चलें, हमें कहीं और जाना है। पाइपलाइन एक जन की टूट गई थी, उसमें विवाद हुआ था, केस हुआ था, टूटने का आदेश आ गया था। आठ तारीख का टूटने का आदेश था, सात तारीख को रोक दिया गया। तो गाली नहीं देगा तो क्या देगा। आपके बारे में ऐसा बोला। हमने सोचा, कहीं भटका के कहीं और ना ले जाए। नहीं छोड़ा आपको। वही वीडियो सुनाई। वही तो बोल रहा है। हम तो अपना काम करते हैं। हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। अच्छा है। कम से कम लोग भड़काएँ तो आपकी स्थिति का भी पता चलेगा, कि मैं उनके बारे में क्या समझता हूँ। क्या सच में आप अपनी समझ से समझ के आए, या ऐसे ही आ गए। तभी पता चलेगा। समझ नहीं होगी तो चला जाएगा। पहली बार अनजान जगह जा रहे हो तो जगह अनजान हो सकती है। लेकिन जिसको सुन के आ रहे हो, वह अनजान कहाँ रहा।
जो था वह कह दिया। उसने यह बात सही कही कि यहाँ कुछ मिलेगा नहीं। यह बात सही कही कि बेमतलब में जा रहे हो। यह अच्छी बात बोली उसने। किसी ने दुकान बंद करके, कैसे करके समय निकाल कर वहाँ जा रहे हो, ऐसा कहा था। लोग काम की भी बात करते हैं। ठीक है।
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वीडियो: आध्यात्म को ना जानते हुए ईमानदारी सत्कर्म के साथ क्या आत्मज्ञान संभव है ? #livesatsang · 2025-03-13