आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P7-0021 · भाग 7

ईमानदारी और सत्कर्म तो पहले से था, किसी ने इस पर गौर नहीं करवाया। क्या आप कुछ नया बता रहे हैं? दूसरे देश से आए व्यक्ति को रुकना चाहिए या चले जाना चाहिए?

ऐसा नहीं कि मैं कुछ इसमें नया बता रहा हूँ। लोगों ने हमें बताया नहीं, हम समझ नहीं पाए। बस बात इतनी सी है। मैं आपको नया नहीं बता रहा हूँ। हमने कुछ पैदा किया नहीं। जैसा मैंने समझा, वैसा बताया। और जैसा था, वैसा हमने समझ लिया। इसलिए इस तरह से बड़े सरल रूप में बता रहा हूँ। ऐसा नहीं कि मैंने कुछ नया पैदा किया। कोई नई विधि पैदा की। ऐसा कुछ भी नहीं। इसलिए तो एक शब्द में, मैं नहीं हूँ। जैसा था वैसा समझा मैंने, और वैसा आपके सामने बता रहा हूँ। बस बात खत्म। अभी तो दूसरे देश से लोग आ रहे हैं। इसी कारण से आमद है। मेन यही है। हाँ तो रहो। रहोगे तब समझ में आएगा। अब जाना नहीं। आप कहाँ गए थे? नहीं जा सकते, बैठो। रोक नहीं सकते तो क्या रोकूँ। बाढ़ थोड़ी ना आ रही थी कि रोक देते। नहीं रोक सकते थे। एक दिन आएगा। एक दिन तो रहो। एक दिन में बहुत कुछ समझ में आएगा। और यही अपना लिया अपने घर पर, तो निकल जाएगा। जितने दिन रह सकते हो, रहो। और यहाँ के क्रम को समझो। जितना हो सकता है, पूरी तरह घर जाकर अपना लो। फिर जरा कमजोरी इधर-उधर हो, तो मजबूती के लिए फिर आ जाना। कुटिया तो रहेगी, मैं रहूँ या ना रहूँ। समझ में आएगा। हमारे कहने से क्या होगा। हम तो कुछ भी बोलें। आप रहिए, समझ में आएगा।

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वीडियो: आध्यात्म को ना जानते हुए ईमानदारी सत्कर्म के साथ क्या आत्मज्ञान संभव है ? #livesatsang · 2025-03-13