प्रश्नोत्तर P6-0189 · भाग 6
गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरा, साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः। इसमें गुरु को परमात्मा क्यों कहा गया है? परमात्मा किसे कहते हैं?
परमात्मा का स्वरूप बोला गया है, यह नहीं कि सीधा परमात्मा बोल दिया गया है। जैसे माता पिता को भगवान का स्वरूप कहा गया है, यह नहीं कि वे भगवान ही बोल दिए गए हैं।
गुरु कौन है। गुरु ब्रह्मा, जिसने अपने जन्म और मरण से अपने आप को छुड़ा लिया हो। गुरु विष्णु, जो अपने पालन से मुक्त हो गया हो। गुरु देव महेश्वर, जिसने अपने विकारों का संहार कर दिया हो। ऐसा कोई भी व्यक्ति, जो इन तीनों से मुक्त हो गया, वह साक्षात है। पर मतलब परछाई नहीं। पर मतलब पार कराने वाला। परम ब्रह्म का स्वरूप हो गया। वह शरीर में है, मानव शरीर में है, पर अब वह मानव नहीं रह गया।
मानो, वैसे भी तुम हो नहीं मानव। तुम अपने आप को मानव कहते हो, पर हो नहीं। मानव शरीर मिला है। यहाँ कोई जानवर भी नहीं है। जानवर का शरीर है। तो परमात्मा का स्वरूप कहा गया है। उसमें इस भवसागर से, परमात्मा तक, मुक्त कराने की क्षमता आ गई। वह पार करा सकता है। पार कराने का मार्ग बता देगा। इतनी क्षमता है। उस क्षमता की वजह से उसे परमात्मा का स्वरूप कहा गया है।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: बिना गुरु के नाम जप सफल होगा कि नहीं ? | गुरु के बिना नाम जप ! #livesatsangyogijika · 2025-03-10