आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P6-0165 · भाग 6

आत्मिक कल्याण करना सबसे आसान है या कठिन? गुरु के नाम पर इतनी विधियाँ क्यों दे दी गईं कि यह जटिल हो गया?

सबसे आसान है अपना आत्मिक कल्याण करना। कुछ करना ही नहीं है। आज सबसे कठिन हो गया, क्योंकि कुछ करने की आदत हो गई। सबसे आसान इसलिए है कि कुछ करना ही नहीं है। करने से मुक्त होना है। न करने में होना कितना आसान है। आसान को हमने कठिन बना लिया। समाज को देखो। गुरु के नाम पर ऐसे लोग मिले, जिन्होंने कहा यह करो, वह करो। इतनी भ्रांतियाँ पैदा कर दीं कि जटिल हो गया। यह तो सबसे आसान था। इस हाथ को पकड़ना कठिन है, क्योंकि ताकत चाहिए। छोड़ने में ताकत नहीं चाहिए। ताकत तो पकड़ने में चाहिए। सारी ताकत पकड़ने में लगवा दी। और छोड़ने के लिए भी कह रहे हैं, यह पकड़ो। छोड़ने के लिए भी कह रहे हैं, यह पकड़ो। हाथ में पत्ते हैं। तुमने एक पत्ता पकड़ा था। उसने कहा यह पकड़ो। है तो पत्ता ही। आज तुम्हें यहाँ से वहाँ लाया, पर हो तुम पत्ते में ही। पत्ता छोटा हो या बड़ा, पत्ते में ही हो। यहाँ से छुड़ाकर वहाँ लगा देते हैं। ऐसे ही कर रहे हैं। तुम कोल्हू के बैल की तरह घूम रहे हो। भारी था, थोड़ा हल्का पकड़ा दिया। फिर इस हल्के को पकड़ाकर फिर भारी कर देंगे। जो तुम्हारे पास था उसकी सफाई कर देंगे, और फिर इसी को पकड़ने आओगे, क्योंकि इससे काम नहीं चलेगा। सोचोगे, इससे अच्छा तो वही था। इतना पकड़ाकर तुम्हें इतना कमजोर कर दिया कि फिर उसी में आओगे, क्योंकि उससे फिर मजबूत होगे। फिर वही बेईमानी और दुष्कर्म। ऐसा ही हो रहा है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: बिना गुरु के नाम जप सफल होगा कि नहीं ? | गुरु के बिना नाम जप ! #livesatsangyogijika · 2025-03-10