आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P6-0143 · भाग 6

जब आत्मज्ञान होता है, तो क्या भीतर के चक्षु खुलते हैं, या ईमानदारी जाग उठती है?

आत्मज्ञान के बाद तो ईमानदारी भी खत्म हो जाती है। ईमानदारी भी कब तक। रास्ता कब तक। जब तक लक्ष्य तक ना पहुंचे। लक्ष्य पर पहुंचने के बाद रास्ता खत्म हो जाता है। छूट जाएगा। वैसे ही, जब तक जीवन में बेईमानी है, तभी तक ईमानदारी है। जीवन से बेईमानी खत्म हुई, तो ईमानदारी भी खत्म। और तुम ना ईमानदार रहे, ना बेईमान रहे। आपके द्वारा जो भी होगा, सत्कर्म होगा। सोना, जागना, उठना, बैठना, आपके द्वारा समाज के हित का कार्य होगा। क्योंकि अब ना तुम ईमानदार रहे, ना बेईमान रहे। ईमानदार हो, तो भी तुम मेरे में ही हो। बेईमान हो, तो भी मेरे में ही हो। बेईमानी कर रहे हो, तो मेरा वाला तुम्हें गिरा रहा है। और ईमानदारी कर रहे हो, तो मेरा वाला तुम्हें उठा रहा है। लेकिन बेईमान हो या ईमानदार हो, हो मेरे में ही। मैं और मेरा से मुक्त हो गए, तो आपकी ईमानदारी भी छूट गई, बेईमानी भी छूट गई। बेईमानी छूटी, तो ईमानदारी छूट गई।

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वीडियो: Sunday Q&A August 2, 2026 #Yogi · 2026-08-02