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प्रश्नोत्तर P6-0135 · भाग 6

आप कहते हैं कि यह समझ का मार्ग है, और यह भी कहते हैं कि बुढ़ापे में यह नहीं होगा। पर बुढ़ापे में तो समझ बहुत ज्यादा हो जाती है। फिर बुढ़ापे में क्यों नहीं होगा?

समझ हो जाती है, लेकिन किसकी। जहां जिए हो, वही समझ ज्यादा हो जाएगी। लेकिन आप उस समझ का उपयोग नहीं कर पा रहे। मैं कह रहा हूं, आप बचपन से निकले। घूमते-घूमते, खाई और पहाड़ों का सामना करते हुए, एक जगह चले आए, और यहां बूढ़े हो गए। अब यहां से जाना है, तो ताकत तो लगेगी, क्योंकि अब यहां से जाना पड़ेगा। आपको कहीं शिफ्ट होना है, या वही वापस आना है। वापस आने के लिए भी ताकत चाहिए। आपको पता मालूम है, लेकिन पता मालूम होने से आप पहुंच थोड़ी जाओगे। मान लो पता भी मालूम हो गया, लेकिन साधन ही खराब हो गया, तो क्या करोगे। जिस साधन के द्वारा आपको जाना है, जिस साधन के द्वारा आपको सब छुड़ाना है, जब वही खराब हो गया, तो क्या करोगे। पता होने के बाद भी आप वही पड़े रहोगे। चलो, पता मिल गया, तो फिर अगला शरीर धारण करोगे, तो निकल जाओगे। पता ही तो समझ लो। समझ आपके साथ जाएगी। बाकी सब यहीं का यहीं रह जाएगा। आपकी समझ आपके साथ जाने वाली है। समझ साथ में जाएगी, तो आप एक काम करो। समझ को विकसित करो। जहां भी हो, पता इकट्ठा करो। आज मैं इस साधन को लेके नहीं जा पा रहा। लेकिन पता इकट्ठा कर लो। जब साधन आपको मिलने वाला है, यह साधन जाएगा, अगला साधन मिलेगा, आप उसमें उस पता का उपयोग कर लेना।

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वीडियो: Sunday Q&A August 2, 2026 #Yogi · 2026-08-02