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प्रश्नोत्तर P6-0085 · भाग 6

क्या हमारे हाथ में सच में पावर है? परिवार में अपने को मालिक कहते हैं, पर बात नहीं मानी जाती और अपने ही पैसे पर गुलाम हो जाते हैं। क्या यही गुलामी है, और फिर क्या करना चाहिए?

बहुत समय पहले की, दो हजार छह के पहले की बात है। हम मेडिसिन लाइन में काम करते थे, वैक्सीन लाइन में। कैंपिंग होती थी। कैंप को लेकर हम भोपाल आए थे। हेपेटाइटिस बी और टाइफाइड के इंजेक्शन का। हुआ यह कि हम लोगों के पास में सिर्फ उतना ही पैसा था, जिसमें खा सकते थे। और चाहिए होता, तो कंपनी के मालिक से मंगाना पड़ता। हम एरिया में जा रहे थे। रास्ते में एक मदारी जादू दिखा रहा था। कहा, चलो, जादू देख लेते हैं। जादू दिखाने में रूमाल थी, उसमें आग लगा दी। बोला, कोई भी सामने आए, तो हम उसे आग लगा देंगे। कोई है ताकतवर? वहां तो कोई नहीं था। लेकिन एक बाबा जी, साईं बाबा की तरह टोपी ऐसे बांधकर, उस भेष में आ गए। बाबा जी आए। लोगों ने कहा, यार, ये तो ताकतवर है। वे खड़े हो गए। बोले, जला मुझे। मुझे जला। साईं बाबा के जैसे भेष था। साईं बाबा को तो प्रणाम करता हूं मैं। लोग बड़े जल्दी आस्था पकड़ लेते हैं। मुख्य बात को न पकड़ें, कुछ और पकड़ लेते हैं। उनके जैसा भेष लिया था। भेष तो रावण ने भी लिया था साधु का। फिर बोले, मैं हूं। अब उसने अपना जादू दिखाया। अब उन्होंने ऐसे किया। अब वह तड़पने लगा, छटपटाने लगा। जादूगर बोला, मुझे छोड़ दो, छोड़ दो, छोड़ दो। तो बोले, इसको मार दूं कि छोड़ दूं। अब पब्लिक तो है ही। पब्लिक हमेशा कहती है, छोड़ दो। बोली, छोड़ दो। चलो, तुम लोग कह रहे हो, छोड़ दिया। अब वह अपना बोरिया-बिस्तर फटाफट लपेटा और भागा। तो बाबा ने कहा, आप लोगों को पता है, यह किसके द्वारा हुआ चमत्कार? कुछ लोग चले गए। कुछ लोग रुक गए। हम जैसे लोग, और भी हमारे साथ थे, सब रुक गए, कि देखें क्या चमत्कार है। तो एक नाग था लिए। बोले, इसके चमत्कार से। जिसको चाहिए, मेरे साथ आओ। नया बिजनेस पाना था थोड़ी। तो चल दिए। बाबा ऐसे बैठ गए एक जगह, जहां खंजाट-वंजाट होता है। वहां बैठ गए। अब लाइन से सबको कहा, सब लोग बैठो। बैठ गए। अब इसमें से कौन मुझे भोजन कराएगा? जितने लोग मुझे भोजन का पैसा दे सकते हैं, रुके। नहीं, तो जाए। कुछ लोग नहीं कराएंगे। तो उसमें से एक-दो लोग उठे, चल दिए। अब बचे पक्के लोग। तो बाबा ने पिटारा खोला। सांप था। बोले, इसको दूध पिलाने के लिए कौन पैसा देगा? तो एक ने दिया एक रुपया, दो ने दिया, तीन ने दिया। बाबा ने कहा, ओहो, नहीं नहीं नहीं, हम पैसे थोड़ी लेंगे। उसका वापस किया, उसका वापस किया, उसका वापस किया। फिर बाबा ने कहा, देखो, यह नाग मेरे पास एक है, और उसी के हाथ में जाएगा जो एकदम समर्पित होगा। चेला बनाना था। अब समर्पण दिखाएंगे न। तो बाबा ने फिर पिटारा खोला। दिमाग में तो है कि वापस दे देगा। अब ज्यादा डिमांड करेगा। अब की बार किसकी आस्था है। सबको लग रहा है, बाबा वापस कर देगा। एक बार कर चुका है। किसी ने पचास, किसी ने सौ दिए। मेरे पास एक नहीं था। मेरे साथ वाले ने दे दिया। उस समय मेरे पास भी होता, तो दे ही देता। क्योंकि दिखाना है कि मैं सबसे समर्पित हूं। एक नाग मुझे चाहिए। सबकी भाव यही थी। उसने कहा, अपनी पूरी श्रद्धा दिखाओ। तो सबने दे दिया। उसने अपना पिटारा बंद किया। बोला, जिसके हाथ में जाएगा, किसी को कहना मत। किसी को दिखाना मत। लेकिन वह नाग सबके हाथ में एक-एक दे रहा था। सब खुश। लेकिन किसी को नहीं पता कि किसके हाथ में है। वह सोच रहा है, मेरे हाथ में है। क्योंकि उसने कहा था, नाग एक ही है। और बताना भी नहीं है, अभी नहीं, नहीं तो ताकत चली जाएगी। तो सब पोटली बांधकर खुश हैं। है तो सबके हाथ में, लेकिन सब यही सोच रहे हैं कि मुझे मिला, किसी को नहीं मिला। यह बात सब सोच रहा है। सब ले लिए। बाबा उठ गए। बोले, अब मैं जा रहा हूं। और जिसके हाथ में गया है, जाकर अगरबत्ती दिखाकर पहन लेगा। आपके हाथ में आया? सबके हाथ में एक-एक आया। एक भी नहीं छूटा। सबके हाथ में आया। प्रसाद की तरह बांट रहा था। उसके पास कई थे। सबको दिया उसने। मुट्ठी में दिया, बंद करो। जेब में ऐसे बंद कर लो। लेकिन किसी से कहना मत। एक के हाथ में जाएगा। तो आप इशारा करके भी नहीं कह सकते, मेरे में भी आ गया, तेरे में। कैसे कहें? पावर खत्म हो जाएगी। अगर मेरे में आया, तो पावर खत्म हो जाएगी। क्योंकि मेरे में आया, तो मतलब उसके में नहीं है। कहानी का सार बता रहा हूं। घर पहुंचकर क्या किया? बाद में फेंका गया। उसका क्या होता है। दोनों ने सोचा होगा, मेरे पास भी होती अगरबत्ती। एक रुपए का नाग कुछ पत्तरा काम करेगा क्या? वह तो उस समय के लिए समझ रहा है। वहां हंसी की बात। आज भी मैं उस पर हंसता हूं। अभी तक सब उठकर जाने लगे। एक लड़का बोल रहा है, बाबा, बाबा। बताया कि मैं कहीं जा रहा हूं, ट्रेन से। मैंने आपको दो सौ दिया है। मेरे को सौ दे दो न, बाबा। तो बाबा बोला, जा, टीटी तेरे को देख भी नहीं पाएगा। वह बोल रहा है, बाबा, दो सौ दिया था। मुझे सौ दे दो न। टिकट का पैसा दे दो। मुझे अभी भी वह सीन दिखता है, और अभी भी उस सीन पर हंसी आती है। अपना पैसा देकर। कुछ ही मिनट पहले उसका पैसा था। अपना पैसा देकर, और उससे दो सौ के बदले सौ मांग रहा है। नहीं दे रहा है वह। बोला, टीटी तुझे देख ही नहीं सकता, तू जा। तुझे चींटी देख ही नहीं पाएगी। उसने किराया नहीं दिया। मुझे यह हंसी आ रही है, कि अपना पैसा देकर। आदमी अपना ही, कुछ ही मिनट पहले उसका पैसा था, और दो सौ देने के बाद सौ मांग रहा है। वह दे नहीं रहा। बोला, टीटी तुझे देख ही नहीं सकता, तू जा। और वह गिड़गिड़ा रहा है, मुझे टिकट का पैसा दे दो न। वह भी कितना लालची। दो सौ क्यों दिया उसने? पावर के चक्कर में सबने इसलिए दिया। सौ क्यों दिया, दो सौ क्यों दिया। पहले जब पिटारा खोला, तो लोगों ने पांच रुपए, एक रुपए, एक रुपए दिए। कई लोगों से लेकर बोला, मुझे पैसे नहीं चाहिए। उसने सबको लौटा दिया। तो लोगों के दिमाग में यह हो गया कि यह सब वापस देगा। चाहे दो सौ दूं, चाहे चार सौ दूं। तो जेब में जितना था, निकालकर देने लगे। पावर के चक्कर में। कि मैं सबसे आस्थावान हूं। लोगों को यह भी था कि पैसा वापस आ जाएगा। दिमाग में एक बात घूम रही थी। और फिर उस नाग ने, उस मुट्ठी ने, बाबा को होल्ड कर दिया। बाबा को अगर पकड़ते भी, तो क्या। वह चल दिया, निकल लिया। मदारी का ही पार्टनर होगा वह। दोनों मिले थे, पब्लिक के सामने। नहीं, दोनों मिले थे। यह तो बाद में समझ में आया। हम लोग भी तो खाने का पैसा दे दिए। हम भी तो भूखे रहे। हमारा भी जितना था, खाने का पैसा बचा था, वह चला गया। हम लोग वापस रूम पर आए। न जाने का भाड़ा, न खाने का। ऐसे ही तो पावर आपके हाथ में नहीं है। यह भ्रम निकाल दो। तुम डाल सकते हो। नाग में कुछ है नहीं। यह नाग ही देने जा रहा है। ट्रांसफर कर, कि मैं ताकत दे आऊं, अपनी नाग लाकर। हम भी अगरबत्ती। मेरे साथ डॉक्टर था। उसने भी अगरबत्ती दिखाया। पेट में भोजन नहीं। फिर शाम तक कहीं से पैसे की व्यवस्था की गई, तो खाया गया। जहां जा रहे थे, जा नहीं पाए, क्योंकि सारा पैसा बाबा के पास चला गया। तो यह हालत है, कि अपना देकर भी हम गुलाम हैं। अब दिखी न एकदम। तो यही हाल आपका भी है। वैसे वह बाबा आपके घर में है। मैं यह बताना चाहता हूं। वह बाबा से कम नहीं है। तुम्हारे बच्चे। हां, बाबा से कम नहीं है। मैं यह बताना चाहता हूं कि उनके लिए सहारा लग रहा है कि मालिक मैं हूं, बाप मैं हूं। और अपने काम के लिए उनसे विनती करनी पड़ रही है। वे हां कहेंगे, तो कर पाऊंगा। नहीं तो नहीं। और मेरी पूरी मर्जी है, ऐसा लगता है। तो ये बाबा की तरह तुम्हारे घर में भी हैं। जहां आप मालिक भी कह रहे हो, और कुछ कर नहीं पा रहे हो। और आप करना भी चाह रहे हो, और सक्षम भी हो सब। आपको करने नहीं दे रहे हैं। तो आप क्या हो, फिर बताओ। वे लोग क्या बाबा से कम हैं? मैं इस कहानी के माध्यम से यह बता रहा हूं, कि वे बाबा आपके घर में ही हैं। आप डाल सकते हो, निकाल नहीं सकते। फिर कहेंगे, जा, तुम जितने में जी सकते हो, उतना खाओ-पियो, पड़े रहो। जैसे वह बाबा बोला, तू जा, टीटी तुझे नहीं देखेगा। मैं कहानी इसलिए बता रहा हूं। और यह जीवन की घटित कहानी है। यह कोई किताब की कहानी नहीं है। यह प्रत्यक्ष मेरे साथ ही घटी है। उस घटना में मैं तो कैसे भी। यह भ्रम तोड़ो कि मैं मालिक हूं। मालिक का मतलब, पूरा आदेश मेरा चलेगा। पूरा आदेश मेरा चले, तब मैं मालिक हूं। लेकिन अगर जहां मेरे आदेश का खंडन हो जाए, तो मैं मालिक नहीं हूं। और मैं कार्य भी ऐसा नहीं कर रहा हूं कि खंडन लायक हो, तो भी खंडन किया जा रहा है। तो इसका मतलब कहीं न कहीं मैं गलतफहमी में हूं। गिरगिट देखते हो? शिकार करने से पहले शिकार के रंग की हो जाती है, और फिर शिकार कर लेती है। तो ये अपने लोग बनकर शत्रु हैं। गलतफहमी से हटो। इस भ्रम से हटो। और कैसे भी अपना कल्याण करो। जीवन में एक व्यक्ति तो मिल ही गया। पुकार रहा है, कि आ भैया, तेरे लिए सब व्यवस्था कर दी है। तू सारी चिंता छोड़, अपना कल्याण कर। क्योंकि वहां तेरी चल भी तो नहीं रही है। जिसके लिए तू मर रहा है, मिट रहा है, वहां तेरी बात भी नहीं मानी जा रही है। आप यह मत समझना कि गुलामी कुछ और है। गुलामी यही है। मैं सर्वेसर्वा होते हुए भी, सबका मालिक होते हुए भी, और मेरी बात नहीं सुनी जा रही है, तो यह गुलामी नहीं तो क्या है? इसी को गुलामी कहा जाता है। ऐसा नहीं है कि आपको कोई जंजीर में बांधकर पेड़ में बांधे, तब तुम गुलाम। तुम चलते-फिरते गुलाम हो गए हो। अपने परिवार में, जहां मेरी भावनाओं को नहीं समझा जा रहा है, मेरी फीलिंग को नहीं समझा जा रहा है, मुझे नहीं समझा जा रहा है, तो वहां मैं गुलाम ही तो हूं। तो अगर ऐसा है, तो निकलो, और अपना कल्याण कर लो। मुझे उस कहानी में यही हंसी आती है, कि अपना पैसा देकर भी भाड़ा मांग रहा है, और वह आखिर तक नहीं दिया। मैं वही देखता रहा। वह क्या देगा। उसको बड़ा मुर्गा फंसाएगा।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 31 मई 2026 #योगी · 2026-05-31