प्रश्नोत्तर P6-0064 · भाग 6
गुरु से इतना डर क्यों रहता है? गुरु और शिष्य के बीच का दायरा क्या होना चाहिए? कुछ भी पूछना चाहते हैं, खुलकर बोलना चाहते हैं, पर बोल नहीं पाते। चलते हुए भी लगता है कि कहीं कुछ गलत न हो जाए और डांट न सुननी पड़े। यह डर कैसे खत्म हो? मर्यादा कैसी होनी चाहिए?
अब तुम्हें देखना है कि डर क्यों है। डर तुम रहे हो। गुरु तो ऐसा कोई काम नहीं कर रहा है कि तुम डरो। वह तो खुलकर जी रहा है तुम्हारे सामने। तो डर का कोई सवाल ही नहीं उठता। तुम डरे क्यों हो, यह तुम्हें देखना पड़ेगा। डर होना ही नहीं चाहिए। लेकिन मर्यादा होनी चाहिए। डर रहे हो तो इसका मतलब अभी तुम समझे नहीं, और प्रबल जिज्ञासु नहीं हो।
डर तुम्हें इसलिए रह गया कि कहीं कुछ ऐसा न हो जाए, कुछ डांट सुननी पड़े, कुछ गलत हो जाए। कहीं न कहीं तुममें लापरवाही है, कमी है, कि कुछ हो न जाए, इसलिए तुम डरते हो। तो उसको हटाओ। अपने आप को इतना ताकतवर बनाओ कि तुमसे गलती या अपराध हो ही नहीं।
मर्यादा का मतलब गुरु के आदेश में जीना। उसके पूरे नियम में जीना। यही मर्यादा है। मर्यादा का मतलब, मैं जिसके लिए आया हूं वही करूं। और जितना उसने बता दिया, उतने में मैं रहूं। बस यही मर्यादा है।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 24 मई 2026 #योगी · 2026-05-24