प्रश्नोत्तर P6-0021 · भाग 6
पूर्ण ईमानदारी नौकरी-बोलचाल में कैसे रखें जब शब्दों में घोल हो जाए?
बल कमजोर है, तो कुछ ना कुछ तो कर लो। ईमानदारी अपना ली है। हां, सब में है।
मत करो। पहले ईमानदार बनो। पहले ईमानदार बनो, बस पहले ईमानदार बनो, उसके बाद बात करो।
देख लो। अभी थोड़ा धैर्य रखना पड़ेगा। विवेक जागृत करना पड़ेगा। इसके बाद ही कुछ होगा। सत्संग सुनते रहो।
देखिए, आप तो द्वार हो, लेकिन जाना आपके पार ही है। वो आपको अपने अंदर देखना है। ईमानदारी अपना लो। ये अपना लो।
उससे क्या मतलब है? अब तो बस। अपना मतलब ही नहीं है किसी से। विचार करो, क्षमता के अनुसार। बस खत्म। उठते रहो। अपने अनुसार जीना है, दूसरों के अनुसार जीना नहीं। निकलना है, तो करना पड़ेगा। सीधी सी बात है। निकलना है, तो करना पड़ेगा।
भाव की बात है। कुछ चाहिए, इसमें कर रहे हो, या ईमानदारी से है। और कुछ नहीं चाहिए, इसमें कर रहे हो, तो वो आपको आगे उठा देगा। हमारी बात को जरा गहराई से समझो।
कर्म ही पूजा है। निष्काम कर्म। आपका, आपके परिवार का भरण-पोषण कर रहे हो, वो कर्म नहीं। जब जरूरतमंद की सेवा करते हो, निष्काम सेवा, वो कर्म पूजा है। कुत्ते-बिल्ली भी अपने बच्चों को पाल-पोस कर, मुंह में दबा के पालते हैं, घोंसला बना के दाना-वादाना खिला के, ईमानदारी से पाल रहे हैं। कौन सी बेईमानी कर रहे हैं?
वही तो कर रहे हो। निष्काम सेवा, जरूरतमंद की सेवा जब करते हो, वो निष्काम सेवा है। अपने बच्चों का भरण-पोषण करो, ये थोड़ी निष्काम सेवा है। ये तो पशु भी करते हैं। वो लेन-देन है। उन्होंने आपके लिए किया, आप उनके लिए किए। और जिसके लिए आप कर रहे हो, उससे आपको कुछ मिल रहा है। चाहे पत्नी हो, चाहे पति हो, चाहे बच्चे हों। आप ईमानदारी से धन कमा रहे हो। अपने परिवार का भरण-पोषण करते हुए, समाज के जरूरतमंद की कितनी सेवा कर रहे हो, वो निष्काम सेवा है। वो कर्म पूजा है। निष्काम कर्म पूजा है। निष्काम कर्म कहां? जरूरतमंद की सेवा।
उसे तो कर्तव्य है, जिम्मेदारी है। नहीं निकालो ना। आसपास देखो। आप करते ही हो, जो भी मिलता है। कुत्ते को रोटी डालना, बहुत सारी चीजें। इसी से आपका उद्धार होगा। लेकिन पूरी तरह ईमानदारी अब भी अपनाओ। तभी कल्याण होगा। नहीं तो नाव में अगर एक भी छेद बाकी रह गई, तो नाव डूब जाएगी। किसी की 99 है, किसी की एक है। परिणाम दोनों का एक ही आएगा। एक की जल्दी डूबेगी, एक की लेट, लेकिन दोनों पहुंचेंगे एक ही जगह। नहीं तो एक भी झूठ आपको वहीं रखेगा। जहां हजार झूठ वाला है, वहां एक झूठ वाला भी दोनों एक ही जगह पहुंचेंगे। लगता है तुलना में हम इससे ठीक हैं। नहीं। तुम दोनों एक ही जगह मिलने वाले हो। थोड़ा इंतजार करो।
शरीर निमित्त बन रहा है। हो तो गई बात। ये आप ही समझो। सत्संग सुनते रहो। पहले ईमानदार बन जाओ।
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