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प्रश्नोत्तर P6-0011 · भाग 6

पूर्ण गुरु भी भटक जाते हैं क्या?

मैं आपको बता रहा हूं। काम, क्रोध, मद, लोभ, मोह, इसी का चक्कर है हर जीव का। तो जब आत्मज्ञान होता है किसी को भी, तो मद, लोभ, मोह यह हटता है। उसके अंदर काम भाव रह जाता है और क्रोध भी रह जाता है। लेकिन अगर वो आत्मज्ञान को उपलब्ध हो गया, तो गलत कभी कर ही नहीं सकता। क्योंकि उससे वो निकल गया। वो किसी के साथ गलत कर ही नहीं सकता। ये तो जाने दो। आप यूज करो, आगे बढ़ो। वो जैसा करेगा उसे मिलेगा। मुझे यूज करना है। मुझे यूज करना सीखना है। कल क्या होगा वो छोड़ दो। आज मुझे यूज करना है। मैं तो ईमानदार रहूं। जब गड़बड़ हो तो छोड़ दो। जैसे राजा बलि ने अपने गुरु का तुरंत त्याग किया था। शुक्राचार्य का तुरंत त्याग किया, जब वो भटकाने लगे। मेरे समझ से तो नहीं भटक सकता। जहां तक मैं समझ सकता हूं, गुरु स्थिति में कोई आ गया तो वह भटक नहीं सकता। गुरु कभी नहीं भटक सकता। वो या तो बना हुआ गुरु होगा। लेकिन मैं आपसे एक बात कहता हूं। मुझे यूज करना है। मैं अगर कहीं गया हूं किसी के पास, चाहे वो गुरु हो, चाहे कोई भी हो, कहीं ना कहीं मैं यूज करने गया हूं। अगर मैं यूज हो रहा हूं, तो कहीं ना कहीं पहले तो मुझे यूज करना है। सबका भाव यही होता है। तो मुझे देखना है कि मैं जिस लिए गया हूं, अगर हो रहा है तो ठीक है, नहीं तो मुझे उसको छोड़ देना है। वो ये भी कहते हैं कि पीठ मत दिखाओ। गिल्ट भी इनडायरेक्टली वो कहते हैं। लेकिन मैं क्या कह रहा हूं, वो सुनिए। मैं तो ये कह रहा हूं कि आप यूज करने के लिए कहीं गए हो। अगर आप जिसके लिए गए हो वो हो रहा है, तो आप रुको, और नहीं तो उसका त्याग कर दो। मेरा यह कहना है। किसी से बंधो मत। और मैं क्या लेने गया हूं, वो मुझे पता होना चाहिए। अगर वो मुझे नहीं पता है तो मुझे कोई भी ठग लेगा। मैं अगर कुछ लेने गया हूं तो उसकी पूरी जानकारी मुझे होनी चाहिए। अगर मुझे ही जानकारी नहीं है तो मुझे कोई नकली ही दे देगा, और मैं ले चला जाऊंगा। अगर मैं कुछ लेने गया हूं तो मुझे उसके बारे में जानकारी होनी चाहिए। मुझे उससे मतलब नहीं है। मैं जिस काम के लिए गया हूं, वो मेरा काम सधना चाहिए। नहीं सध रहा है तो उसको छोड़ दो। वो जाने, उसका कर्म जाने। क्योंकि कैसे सिद्ध करोगे कि कोई पूर्ण गुरु है कि नहीं है। मैं गया हूं। अगर मुझे लाभ हो रहा है, मेरे जीवन में बदलाव आ रहा है, जिस उद्देश्य को मैं लेके गया हूं, अगर वो उद्देश्य मेरा पूरा हो रहा है, तो ठीक है, और नहीं तो फिर इसको त्याग करो। कहीं और ढूंढो। कमी तो है नहीं। मेरा ये कहना है। किसी को पकड़ मत लो कि नहीं, तुम ही करोगे। एक से बढ़कर एक घूम रहे हैं। ये तुम नहीं करोगे, तो मैं कहीं जाऊंगा। लेकिन मैं जिस उद्देश्य को लेके आया था, अगर वह पूरा होता है तो ठीक है, नहीं तो मैं आगे बढ़ जाऊंगा। मैं अपनी एक घटना बता रहा हूं। मैं जब खोज में था, मुझे अनेक तरह के लोग मिलते थे। तो मुझे एक जन मिले, वो बीटेक किए हुए थे, बंगाल के थे। तो वो मुझे बता रहे थे कि मैं आपको प्रत्यक्ष बताऊंगा नहीं, दिखाऊंगा। अब मैं उनके साथ बहुत समय तक था। तो वो गांजा भी पीते थे। मैं बैठा रहता, वो गांजा पी रहे होते। मुझसे क्या मतलब, वो गांजा पीते थे, मैं उनके पास ऐसे बैठता रहता था। एक दिन उन्होंने ऐसे मेरे तरफ गांजा किया। तो मैंने कहा, जिस उद्देश्य को लेके मैं आया हूं, क्या इस गांजे से पूरा होगा? अगर आप कहिए तो मैं इसे पीऊंगा। मेरा उद्देश्य पूरा होना चाहिए। तो वो बोले, नहीं, ये एक नशा है। तो मैं बोला, मैं नशा करने नहीं निकला हूं। आप पर मैं भरोसा करता हूं, और आपकी बात मुझे समझ में आ भी रही है। अगर आप कहो कि इस गांजे से, मैं जिस लिए निकला हूं, जिस उद्देश्य को लेके निकला हूं, अगर वो खोज मेरी इससे पूरी होगी, तो एक हाथ से नहीं, दोनों हाथ से गांजा ही पीऊंगा। क्योंकि मुझे अपने लक्ष्य से प्रेम है। तब उन्होंने कहा, नहीं, यह एक नशा है। तो मैंने कहा, मुझे नशा नहीं करना है। तब उन्होंने अपना हाथ हटा लिया। अगर मैं ईमानदार हूं तो मुझे कोई धोखा नहीं दे सकता। यह मेरे जीवन का व्यक्तिगत अनुभव है, और आप लोगों का भी होगा। अगर मैं पूर्णतः ईमानदार हूं तो मुझे कोई ठग नहीं सकता। और अगर मुझे कोई ठग रहा है, मैं एक साल के बाद चिल्ला रहा हूं कि इसने मुझे ठग लिया, तो एक साल तक मैं भी कोई लालच में था कि मुझ पर ये कोई कृपा कर देगा। मैं भी कल्पना में जी रहा था। मैं भी सोच रहा था, इसकी चापलूसी करके इससे कृपा ले लूंगा। हम भी कहीं ना कहीं चापलूस थे। एक साल इंतजार नहीं करते। हम जिस उद्देश्य को लेके गए थे, वह तुरंत पूरा होना चालू होता है। बात हमारी तुरंत होती है। हम एक साल इंतजार थोड़ी ना करेंगे।

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वीडियो: दिल्ली में पहला सत्संग पार्ट 2 #योगी · 2026-02-01