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प्रश्नोत्तर P5-0198 · भाग 5

सबकी जरूरत अलग कैसे? राष्ट्रपति को इतनी सुरक्षा-घर क्यों?

सबकी अपनी-अपनी जरूरत है। अपनी सामर्थ के अनुसार, समाज के अनुसार, काम के अनुसार, सबकी जरूरत है। क्योंकि सबके समय की वैल्यू अलग-अलग है। एक ही कंपनी में सब काम करते हैं। लेकिन कोई एक घंटे में जाके निकल आता है, वो लाखों की पगार ले रहा है। कोई आठ घंटे काट रहा है, उसको उससे कम पगार मिल रही है। सबकी वैल्यू अलग-अलग है। सबके समय की वैल्यू अलग-अलग है। सबकी जरूरत अलग-अलग है। यहां देखो, कितने लोग आधा पेट खा के सोते हैं, इसी समाज में। कितने लोगों के पास घर है, तो बारिश में चू रहा है। सही मकान नहीं है, झोपड़ी है। कितने लोग फुटपाथ पर रह रहे हैं। लेकिन राष्ट्रपति को कितने घर दिए गए हैं। कहीं जाओ, एरिया में डॉक्टर उपलब्ध नहीं, शिक्षक उपलब्ध नहीं, स्कूल नहीं। लेकिन राष्ट्रपति के लिए कितने डॉक्टर लाइन से खड़े हैं। क्यों? क्योंकि उसकी जरूरत है। उसके द्वारा ऐसा काम भी हो रहा है। इसलिए उसे सुरक्षा की जरूरत है। अभी कोई बोल दे, राष्ट्रपति के जितनी मुझे भी सुरक्षा दो। नहीं कह सकता। आप में मानवता नहीं है, ऐसा सरकार से कह सकता है? मेरे पास एक घर नहीं है, और राष्ट्रपति के पास कितने घर होते हैं? राष्ट्रपति भवन में ज्यादा होते हैं, ऐसे भी। डॉक्टर कितने होते हैं? बहुत डॉक्टर, बहुत सुरक्षा कर्मी, बहुत कुछ होता है। अब बोलोगे, क्या जरूरत है? मेरे पास एक घर नहीं। भाई, उसका लेबल है। अब उसकी जरूरत उतनी है। अब वो कहीं जाएगा तो करोड़ों की गाड़ी से जाएगा, और गाड़ी भी बुलेटप्रूफ रहेगी। तुम ऐसे भी कहीं चले जाओ, तुम्हें कोई नहीं पूछेगा। कहोगे मारो, तो भी कोई नहीं मारेगा। गोली खराब हो जाएगी। अब तुम यहां से बैठकर कहो, राष्ट्रपति को जितनी सुरक्षा मिलती है, मुझे भी दो। मैं इस देश का निवासी हूं। मेरा भी देश है। मुझे भी सरकार इतनी सुरक्षा दे। तो क्या होता है? सबकी जरूरत अलग-अलग है। जैसा काम, वैसी जरूरत। राष्ट्रपति के द्वारा वैसा काम भी तो हो रहा है। क्या ये व्यक्ति वो काम कर सकता है? राष्ट्रपति वाला कार्य आपके द्वारा थोड़ी होगा। नहीं तो आप वहां होते। तो यहां क्या होता है? आपकी वैल्यू से, आपकी जरूरत और आपकी योग्यता के अनुसार, आपको व्यवस्थाएं मिलती हैं। अपने बच्चों को उतना ही दिलाइए, जितनी जरूरत हो। उनसे पूछिए, दिलाने के बाद इसका उपयोग क्या करोगे। ऐसे मुझे भी कोई कह सकता है। आप तो बोलते हो जरूरत में जियो, दो गाड़ियां खड़ी हैं, एक और ले रहे हो। सात-आठ लाख की गाड़ी क्यों नहीं लेते, फॉर्च्यूनर क्यों ले रहे हो? आप जैसे लोग भी बोल सकते हैं, हमें तो बोलते हो जरूरत में चाहिए, और आप इतनी बड़ी गाड़ी, क्या जरूरत है? जरूरत मेरी जरूरत है। मेरा काम है। जरूरत तभी तो लिया जा रहा है। जब मैं सेवक रूप में था, तब क्या जरूरत थी। अब इसकी जरूरत पड़ गई। फैलाव हुआ। उपयोग भी हो रहा है। यहां जितना बनता जा रहा है, उसका उपयोग हो रहा है। पहले आप आए थे तो उधर ही था। अब इधर देखो, उपयोग तो हो रहा है। तो सबकी जरूरत अलग-अलग है। आप उससे कम कंपेयर मत करना। आपकी योग्यता के अनुसार ही आपके पास जितना धन, समझ और तन का बल है। आपकी योग्यता के अनुसार, आपके कर्म के अनुसार। अब आप उसका उपयोग कैसे करते हो। मेरा कहना है, आप अपनी जरूरत को समझो। अपने काम को समझो। सबकी जरूरत सबको पता है। मेरा काम किस तरीके से फैलेगा, ये मुझे पता है। आपका काम किस तरीके से फैलेगा, ये आपको पता है। अपने काम में क्या-क्या साधन लगता है, आपको पता है। मेरे काम में क्या-क्या साधन लगता है, मैं लूंगा। काम करना है। एक इंजीनियर है, और वही बिल्डिंग बनाने में एक मजदूर है। दोनों की जरूरत अलग-अलग होगी। वो लैपटॉप ले आएगा, बिल्डिंग के पास। मजदूर कहेगा, इसकी क्या जरूरत है, हमारी तरफ फरसा उठा। तो बिल्डिंग बनेगी ही नहीं। बिल्डिंग तभी तू बना पा रहा है, जब ये नक्शा दे रहा है। नक्शा उस कंप्यूटर के द्वारा ही बन रहा है। कंप्यूटर हटा दो, उसे इतनी अच्छी व्यवस्था ना मिले, इतना अच्छा घर ना मिले, तो मानसिक काम नहीं कर पाएगा। तब मजदूर बोले, तू मेरे साथ चल, फरसा लगा। अगर उसके साथ लग गया, तो बिल्डिंग ही नहीं बनेगी। उसकी समझ से मैं लग जाता हूं, तो क्या वो पुल बन पाएगा? दिख तो रहा है कि मजदूर पुल बना रहा है। क्या मजदूर पुल बना रहा है? वो किसी के द्वारा बन रहा है। इंजीनियर के द्वारा नक्शा निकला। इंजीनियर भी किसी सिस्टम के द्वारा निकाला है। तो उतना तो उसे सिस्टम चाहिए। मान लो, अपने दिमाग से बता भी दे, ऐसे-ऐसे कर देना। क्या तुम बिना पेन, कॉपी, बिना नक्शे के कर पाओगे? ठेकेदार को इंजीनियर सब बता ही दे, बिना लिखा-पढ़ी के। क्या ठेकेदार पूरा याद कर पाएगा, कौन सा पिलर कहां रखना है, कितना मिलीमीटर सरिया, कितना माल, कितना मटेरियल, कितना सामान डालना है? ठेकेदार याद कर सकता है? वो पूरा सिस्टम से निकाल के देता है। ये नक्शा है। ऐसे-ऐसे तुम्हें बनाना है। दिख तो रहा है कि मजदूर बना रहा है, ठेकेदार बना रहा है। लेकिन वो किसी के द्वारा। यहां हर काम किसी के द्वारा हो रहा है। हम यहीं रात में फंस जाते हैं। जैसा व्यक्ति काम करता है, वैसा उसे साधन चाहिए। इंजीनियर को फरसा दे दोगे, तो कुछ नहीं कर सकता। हाथ-पैर में ही मार लेगा। मजदूर को कंप्यूटर दे दोगे, तो कुछ नहीं कर सकता। नाटक चलाएगा, इसमें कुछ नहीं कर सकता। तो जिस लायक आप हो, वैसा आपके पास व्यवस्था है। वैसा आपके पास साधन है। साधन को उलट-पुलट भी कर दो, तो काम ही नहीं हो पाएगा। मजदूर को गाड़ी दे दो, इसका बंगला दे दो, लैपटॉप दे दो, बावला हो जाएगा। शराब पी के उसी रूम में लोट जाएगा। लैपटॉप, जैसे तीन साइकिल तोड़ी, वैसे लैपटॉप तोड़ देगा, टीवी तोड़ देगा, पी के सब तोड़ डालेगा। और इंजीनियर क्या करेगा, अगर इसको फरसा चलवाओगे? कभी पैर में मार लेगा। उससे नहीं हो पाएगा। कहने का मतलब ये है। अपनी जरूरत और अपनी क्षमता के अनुसार आपको साधन दिया गया है। यहां सबका जैसा काम है, वैसा साधन दिया गया है। जैसे कंपनी में सबको साधन अलग-अलग दिया जाता है। जिसका काम है, हेल्पर को अलग, सुपरवाइजर को अलग, मैनेजर को अलग, मालिक को अलग। वैसे ही ये एक प्रकृति की कंपनी है। यहां सबको योग्यता के अनुसार साधन दिया गया है। और अगर आप बेईमानी से कोई साधन और लाए, तो उसकी भरपाई करनी पड़ेगी। तो देख लो, मेरी क्षमता क्या है। मैं क्या काम कर रहा हूं। मेरे काम को आगे बढ़ाने में क्या-क्या साधन चाहिए। वो साधन के द्वारा ही काम होगा। सब यहां एक-दूसरे के पूरक हैं। बेईमानी मत करो।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 23 अगस्त 2026 #योगी · 2026-08-23