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प्रश्नोत्तर P5-0170 · भाग 5

पवित्र कैसे करें?

सत्कर्म करो। अपने आप को पूरी तरह पवित्र कर दो। बस। जितने लोगों को आज तक प्रभु का मिलना हुआ है, प्रभु दर्शन हुआ है, वह उन्होंने अपने आप को पवित्र किया है। इतना तो इतिहास पढ़े हो, पूरी तरह। तो सीधी साधी बात है, अपवित्रता में उसका मिलना होगा नहीं। इतना तो पक्का है ना। पवित्रता में होगा। तो अपने को उससे मिलने के लिए प्रयास करना चाहिए, पवित्र बनाने के लिए। आप बताओ फिर, लेकिन हम क्या कर रहे हैं? पवित्र नहीं कर रहे, अपने आप को अपवित्र कर रहे, और उसके मिलने के लिए साधना कर रहे। और ऐसा कभी हो नहीं सकता। बेईमानी नहीं छोड़ेंगे, लहसुन प्याज छोड़ देंगे। क्या, जेब काटना लोगों का नहीं छोड़ेंगे, मन रोकेंगे, निर्विचार होने का प्रयास करेंगे, जो कि कभी हो नहीं सकता। विचारों से मुक्त होने का प्रयास करेंगे। लहसुन प्याज छोड़ देंगे, लेकिन बेईमानी, जिससे मैं अपवित्र हुआ हूं, बेईमानी करके, वह नहीं छोड़ूंगा। हां, जिससे कुछ हो जाएगा वो नहीं कर रहे, जिससे कुछ नहीं होगा वो कर रहे। अब मन कभी रोका नहीं जा सकता। जब तक चाहिए चाहिए में मन काम करता है। आपको देखिए ना, आपको क्या चाहिए, उचित या अनुचित। इसके बाद निर्विचार भी नहीं हुआ जा सकता। देश, काल, स्थिति, परिस्थिति, विचार आएंगे। विचारों से कभी मुक्ति पाई नहीं जा सकती। लेकिन लोग साधना करवा रहे हैं, ध्यान कर रहा हूं। ध्यान किया ही नहीं जा सकता। ध्यान घटित हो रहा है, उसे समझना है। जितना काम नहीं किया जा सकता उतना लोग करवा रहे हैं, और लोग एकदम भ्रमित हैं। ध्यान करना है, ध्यान कर। अरे भाई, ध्यान को समझना है। प्राकृतिक में आ जाना है। अप्राकृतिक हम कर रहे थे, अपनी कामनाओं में, अपने तरीके से। उसका त्याग कर देना। बस यही है साधन। जितना आप बेमतलब का काम कर रहे हो, जिससे आप अशुद्ध हो रहे हो, वह बंद कर दो। बात खत्म। कितना सीधा और सरल है। लेकिन आप क्या कर रहे हो? उपलब्धि चाहिए। बेईमानी बिना तो नहीं चलेगी। परसेंटेज में छोड़ा हूं कुछ। अब बताओ, परसेंटेज में बेईमानी छोड़ रहे हो? अरे, हां या ना। या तो आप ईमानदार हो, या तो बेईमान हो। बात खत्म। या तो पवित्र हो, या तो अपवित्र हो। बात खत्म। या तो जिंदा हो, या मर गए। नहीं, लेकिन नहीं। परसेंटेज में जाना है? किस्मत? अपवित्र कैसे किए हो, पहले यह देखना पड़ेगा, और वो बंद करना पड़ेगा। और फिर ईमानदारी से जीवन जीते हुए सत्कर्म करना पड़ेगा। सत्कर्म करके अपने आपको पवित्र कर सकते हो, और ईमानदारी अपना के।

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वीडियो: Live प्रत्यक्ष ज्ञान प्रश्न और उत्तर / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-10-15