प्रश्नोत्तर P5-0152 · भाग 5
कामना और इच्छा अलग-अलग हैं या एक ही?
इसे समझना पड़ेगा। इच्छा दो होती हैं: एक जरूरत की इच्छा होती है, और एक मान के लिए चाहिए, वह इच्छा होती है। कामनाएं, कुछ ना कुछ तो हमें जीवन जीने के लिए चाहिए। हम उन कामनाओं में फंसे हैं जो मुझे मान के लिए चाहिए, बड़ा बनने के लिए चाहिए, दिखाने के लिए चाहिए कि मैं कुछ हूं, मुझे कुछ बनना है। हम उस इच्छा के चक्कर में फंसे हैं।
इच्छा से ही कामना पैदा होती है। जैसे मुझे भूख की इच्छा जगी, तो भोजन की कामना हुई कि भोजन मिल जाए। इच्छा से कामना आएगी, कामना से इच्छा नहीं आएगी; पहले इच्छा होगी। अगर भूख लगी ही नहीं, तो भोजन की कितनी भी आप इच्छा बनाइए, कामना नहीं होगी कि मिल जाए। पहले जरूरत होगी, फिर कामना होगी कि मुझे इस प्रकार का भोजन चाहिए, मिल जाए। तो ये दोनों अलग-अलग हैं।
इच्छा दो हैं: एक इच्छा अपनी जरूरत है, एक इच्छा हम मान के लिए बनाते हैं, और उस इच्छा से परेशानी है। अपेक्षा क्या है? हमने किसी के लिए किया तो हमने अपेक्षा बना ली कि वह मेरे लिए करे, उसका रिटर्न मिले, वह अपेक्षा है; कोई भी काम करते हैं तो अपेक्षा में करते हैं। उसके बाद आता है भाव। इच्छा में, जरूरत में भाव बन जाता है। भाव दो होते हैं: एक जब जरूरत होती है, कर्म के पहले, क्योंकि जब कोई इच्छा जगी तो उसके लिए कर्म करना पड़ेगा, और एक कर्म के बाद।
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वीडियो: Live प्रत्यक्ष ज्ञान प्रश्न और उत्तर / #योगीजी_का_सत्संग · 2024-10-15