प्रश्नोत्तर P5-0138 · भाग 5
सेवा में गुस्सा आ जाए / गलती हो जाए तो क्या?
गुस्सा आता है तो होना नहीं चाहिए ना। इतना मजबूर क्यों हो गया कि कोई बार-बार बोले? बोल दे कि अभी दे देता हूं, बना देता हूं। और वह अपने लिए तो बोल भी नहीं रहे थे, लोगों के लिए बोल रहे थे ना। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत सेवा तो नहीं बोली। तो अपने गुस्से को हटा। ऐसा ना हो कि तेरा गुस्सा तुझे गिरा दे। जीवन में उठने का मौका मिला है, अपने कल्याण में पूरी तरह लग जा। तू कहता है कि शरीर थक गया था; हो सकता है वह तुझसे ज्यादा थका हो, तभी तो बोला। तुझे दिखा कि दोष किसका था? तेरी कमजोरी थी। चल अच्छा है, कम से कम देख लेगा तो अपने आप निकाल लेगा। कोई बात नहीं, होता है।
मुझे सोच-समझ के बोलना चाहिए कि अगर सामने वाला व्यक्ति मुझे सार्वजनिक कार्य के लिए बोल रहा है, तो हो सकता है वह मुझसे ज्यादा थका हो। वह भी मुझे कार्य करते देख रहा है और वह भी कर रहा है। हो सकता है उसे और कोई बहुत जरूरी काम हो। तो अगर मेरे पास कोई और काम नहीं है, तो मुझे वह काम कर देना चाहिए। करते हुए बहुत होगा तो मैं गिर जाऊंगा, और गिर गया तो बातें खत्म, तब तो मैं पहुंच ही जाऊंगा, तब तो कोई रोक ही नहीं सकता। काश मैं उतनी मेहनत करूं कि गिर जाऊं; अपने आप को इतना झोंक दूं सत्कर्म में कि बस मैं खत्म ही हो जाऊं। काश ऐसा हो जाए। कोई बात नहीं, उतार-चढ़ाव होता है, लेकिन कैसे भी अपने कल्याण में लग जाओ।
क्योंकि हमको हमेशा गिरना आता है, उठना भूल गए हैं। देखो, खाना हर जीव को आता है। जीव पैदा हुआ, उसे कुछ नहीं पता, लेकिन जानवर के बच्चे मां के स्तन को ढूंढ लेते हैं। लेकिन धोना सिखाना पड़ता है। वह शुरुआत जरूरत में करता है, फिर उस खाने में गिरने लगता है; खाने में ही हम गिरे हैं, खाना हम नहीं भूले। उसके पास कोई समझ नहीं है, इंद्रियों का कोई ज्ञान अभी नहीं है, लेकिन खाना उसे आता है, वह सही जगह डालता है। बहुत सारे छेद हैं, कान में नहीं घुसाता, सीधा मुंह में ही लाता है। तो कुल मिलाकर हमें अपना बिगाड़ना आता है। इसलिए बड़ा संभल के चलना पड़ेगा।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 16 अगस्त 2026 · 2026-08-16