प्रश्नोत्तर P5-0135 · भाग 5
ज्ञान/समझ दिन में बदलती रहती है — ईमानदारी स्थिर कैसे रहे?
अंदर उथल-पुथल हो रही है, लेकिन आप क्या करते हो, वह करो। आप पीछे मत हटो। लेकिन अगर आप भी विचार का साथ दे दोगे तो आप भटक गए। आप क्या करते हो, उससे परिणाम आता है ना; आप क्या सोचते हो, उससे परिणाम नहीं आता। परिणाम तो हमेशा इससे आता है कि आप क्या करते हो। आप दुकान पर गए, तुमने विचार बनाया कि मैंने सारा सामान ले लिया, तो क्या तुम्हें उसका मूल्य देना पड़ेगा? लेकिन तुमने जितना इस शरीर के द्वारा लिया, उसका मूल्य तो पे करना पड़ेगा। तो तुम क्या विचार बनाते हो, उससे कोई मतलब नहीं। आपके द्वारा काम क्या हो रहा है, उससे परिणाम आता है। तो विचार को आने दो।
बस एक ही लाइन पकड़ के रखो: ईमानदारी ना छोड़ना, चाहे फिर प्राण टूटने की भी बात आए। कुछ भी छूट जाए, आगे कुछ भी बात आ जाए, मैं तो कह रहा हूं कुछ भी, मतलब कुछ भी, प्राण भी चला जाए, ईमानदारी ना छूटे। कुछ भी हो जाए, यह पक्का; बस ईमानदारी पकड़, ईमानदारी मत छोड़ना। और जितनी ताकत है, उसके द्वारा सत्कर्म करो। ईमानदारी तो पकड़ ली, और ताकत का भी उपयोग करना है। तो ईमानदारी और सत्कर्म, यह कभी ना छोड़ना। आखिर में तुम ही बचोगे, और जब तुम ही बचोगे तो उसमें तो सब कुछ है।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 16 अगस्त 2026 · 2026-08-16