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प्रश्नोत्तर P5-0132 · भाग 5

आत्मिक कल्याण चाहने वालों को विशेष क्या ध्यान देना चाहिए?

जितने लोग आत्मिक कल्याण के लिए साधना कर रहे हैं और जितने लोग चाहते हैं कि मेरा आत्मिक कल्याण हो जाए, उनको विशेष यह ध्यान देना है कि मेरे द्वारा सत्कर्म हो। हर व्यक्ति को देश, काल, स्थिति, परिस्थिति में जीने का तरीका आना चाहिए, तभी तुम पार कर सकते हो। अगर हर मौके पर तुम चाहो कि मुझे कोई बताए, तो तुम आगे मोक्ष की तरफ बढ़ ही नहीं सकते, क्योंकि अपाहिज व्यक्ति को जहां कोई छोड़ता है, वहीं रुक जाता है। अपाहिज मत बनो, चाहे वह शारीरिक हो चाहे मानसिक हो। अपाहिज व्यक्ति को जहां तुम छोड़ दो, वहीं खत्म हो जाएगा। और अध्यात्म एक ऐसी यात्रा है कि एक समय ऐसा आएगा कि आपको अकेले सारा फैसला लेना पड़ेगा। आपका कोई सहायक बन सकता है, चाहे गुरु हो, चाहे मूर्ति पूजा हो, चाहे माला हो, चाहे मंत्र हो, चाहे आपकी ईमानदारी हो, चाहे सत्कर्म हो। लेकिन हर देश, काल, स्थिति, परिस्थिति में आपके अंदर खुद यह क्षमता होनी चाहिए कि मैं फैसला ले सकूं। हर वक्त, हर क्षण आपको कोई बताने वाला नहीं रहेगा, और आपको हर क्षण अपने कर्म के प्रति ध्यान देना है कि अगर मुझे कुछ ठीक करना है तो मैं किस तरीके से ठीक कर सकता हूं। जैसे इस काम को मैंने बोला, इसके पहले आपके अंदर आ जाना चाहिए था कि इसे कैसे ठीक किया जा सकता है। अगर मेरे अंदर आ सकता है कि उसके लिए गेट खोल दो, वह चला जाएगा, और देखो वह चुप हो गया, तो यह आपके अंदर क्यों नहीं आया? यह आपके अंदर आना चाहिए कि इसे ठीक कैसे किया जा सकता है। मशीन की तरह जीवन मत जियो, अपने अंदर मानवता लाओ कि मैं क्या कर सकूं। अपने शरीर को देखो ना, अपने शरीर को भोग में खत्म करो या योग में खत्म करो। योग का मतलब क्या होता है? आंख मूंद के बैठना नहीं। योग का मतलब होता है साधना, और साधना का मतलब होता है कि मैं किसी के लिए क्या कर दूं। जब आप परोपकार की भावना रखते हो कि मुझे सत्कर्म करना है, मुझे परोपकार करना है, मेरे पास धन नहीं है, मेरे पास बस तन है, मेरे पास समझ भी उतनी नहीं है, तो प्रकृति तुम्हारी जिज्ञासा को लेकर व्यवस्था दे देती है। लेकिन तुम क्या करते हो? तुम बोल दोगे कि मैंने तुम्हारा ठेका लिया है? अरे, तेरा ठेका कौन लेगा? तुझे अगर कल्याण करना है तो ज्यादा से ज्यादा सेवा करेगा, तभी ना होगा। पहले तो तूने मांगा कि मुझे सत्कर्म का मौका मिले, मैं ईमानदारी से जीवन जियूं, और जब मिल गया तो कहता है मैंने ठेका लिया है, मैं क्यों करूं? तो मांगा क्यों? तब प्रकृति आपको देना बंद कर देती है। क्योंकि कर्म करके ही आप फंसे हो, तो कर्म करके ही मुक्त होगे। आपने अपनी कामनाओं की, वासनाओं की पूर्ति के लिए काम किया और आप बुरी तरह फंस गए। अब आप ईमानदारी से सत्कर्म करोगे, तब जाकर आपका कल्याण होगा। अब आपकी इतनी पावर नहीं है कि बड़ा सत्कर्म कर सको, उतना धन नहीं है, उतनी समझ नहीं है, पर तन का बल है। तो तन का बल, जहां आप गए हो, वहां पूरा झोंक दो, जैसे कोई कहे कि मैं पूरी तरह सेवा में ही अपने आप को समर्पित कर दूंगा। लेकिन जब तुम्हें अपने आप को निकालने का, ज्यादा से ज्यादा सेवा का मौका मिला, तो तुमने क्या किया? जिसकी सेवा का मौका मिला, उसको तुम परेशान करने लगे। तो तुमसे मौका छीन लिया गया। अब क्या करोगे? अब आंख बंद करके कहीं बैठो, उससे कुछ नहीं होने वाला है।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 16 अगस्त 2026 · 2026-08-16