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प्रश्नोत्तर P5-0124 · भाग 5

युवा उम्र में ध्यान जाना चाहिए? पैसे के साथ साधना कैसे? आलस साधना में कैसे रुकावट?

ईमानदारी और सत्कर्म करो। मूल यही है। और ध्यान में ध्यान करो। अभी तक ध्यान ही कर रहे हो। ध्यान में ध्यान करो। जब भी आप कुछ कर रहे हो, इतना ध्यान रखो, कोई गलती ना हो जाए। यही है ध्यान में ध्यान। आलस्य। अब आलस्य की वजह से अगर आप कर नहीं रहे हो, तो वह काम आगे बढ़ेगा नहीं। वही रुक जाएगा। तो रुकावट तो आ ही गई। इसलिए आलस होना ही नहीं चाहिए। शारीरिक, मानसिक दोनों। क्योंकि मानसिक तो आप फैसला लेते हो, मुझे यह करना है। और करते किससे हो? शरीर से। शरीर से करते हो ना। तो मेन तो अभी आपके लिए शरीर ही है। अभी मानसिक वाली स्थिति पर पहुंचे नहीं हो। मानसिक वाली स्थिति पर व्यक्ति आत्मज्ञान के बाद पहुंचता है। अभी तो हमें बाहर से छुड़ाना है। अभी तो शारीरिक ही करना पड़ेगा। शारीरिक आलस शरीर की असमर्थता से भी आता है। तो बीच में रुकावट है, तो उसके लिए शारीरिक सुधार करना सही है। हां, शारीरिक सुधार करिए। लेकिन अगर आप साधना करेंगे तो वह शरीर अपना सुधार कर लेगा। अगर आप उसे उस जगह ले जाएंगे, तो धीरे-धीरे आप देखेंगे, आप स्वस्थ भी होते जाएंगे। आप किस तरफ बह रहे हो, किस तरफ जा रहे हो। आप मजबूत होते जाएंगे। और पता चला, उस कमजोरी की वजह से आप कर नहीं रहे, तो आप और कमजोर हो जाओगे। मानसिक भी कमजोर होंगे, शारीरिक भी हो जाएंगे। मैं आप लोगों को एक बात बताता हूं। यही सब। मौजूद हो। गर्मी में बाथरूम लगता है तो आप तुरंत उठकर चले जाते हो। लेकिन ठंडी में जब बाथरूम लगता है तो आप नहीं जाते हो। क्या आपसे, आपके शरीर में ताकत नहीं रहती? खूब रहती है। आप घंटों नहीं जाते हो। बहुत जब तेज लगती है, तब जाते हो। अब बताइए तो। जबरदस्ती वाला आलस है या नहीं। इसका तो अनुभव सबको होगा। मुझे भी है। बाद में उठेंगे, तभी जाएंगे। अब यह आलस जबरदस्ती है या नहीं, बताओ। तो ऐसे ही हम आलस करते हैं। जहां पर जरूरत नहीं। और यह बचपन से है। अभी भी होगा। यही, नींद कब आती है। वही तो, नहीं चाहता तो नहीं सोना है। एक झापड़ मार लेना अपने मुंह पर। महान व्यक्ति अपने पर अनुशासन करता है। कमजोर व्यक्ति दूसरों पर अनुशासन करता है। यह ध्यान रखना। जिंदगी में याद रखना। महान व्यक्ति कभी आप पर अनुशासन नहीं करेगा। महान व्यक्ति स्वयं पर अनुशासन करता है। वही महान होता है। और कमजोर व्यक्ति हमेशा दूसरों पर अनुशासन करना चाहता है। यह आप ध्यान रखना। यह तो आप देख लेना, कि आप कमजोर हो कि महान हो। आप महानता की तरफ जा रहे हो कि कमजोरी की तरफ जा रहे हो। आप ध्यान रखना। आलस में इधर दो टाइम खाना करके, इधर कुछ करना नहीं है। यह आलस में आता है। यही भी आलस में। आप रहो तो समझ में आ जाएगा। कुछ करना नहीं आता। अगर कुछ करे तो आलस्य में आ जाएगा क्या। जब कुछ नहीं करना है तो बस आप कुछ ना करने में जियो। अगर कोई व्यक्ति इस नियम को बनाया है, कुछ समझ के बनाया होगा। आप उसमें जियोगे तो समझ में आएगी। आलस्य तो वह है। आपके लिए जरूरी था, आपने कह दिया था, और कर नहीं रहे हो, और आप करने लायक भी हो। वह आलस्य है। अगर आप करने लायक नहीं हो, तब आप नहीं कर पा रहे हो, तो वह आलस्य नहीं है। जैसे किसी का शारीरिक वजन बहुत है। इच्छाएं साधक बनने की हैं, और रास्ते पर चलने की इच्छा। लेकिन जो शरीर है, वह साथ नहीं दे रहा। क्योंकि वह कई सारी वजन के कारण। शारीरिक दिक्कतें शरीर में आना शुरू हो जाती हैं। उस कारण से व्यवहार बदलता है। अगर वह सही रहे तो उसका व्यवहार अलग रहेगा। शारीरिक वजन कम हो तो उसका व्यवहार अलग रहेगा। यह मैंने अनुभव किया है। तो उस व्यक्ति को अपनी साधना के लिए अपने आप को सही करना सही है। एकदम सही करना ही चाहिए। अगर कुछ करने से हमारा हित हो, या और किसी का हित हो, तो जरूर करना चाहिए। करना ही चाहिए। अगर आपको लग रहा है कि मैं यह करने से मेरा हित होगा, तो आपको जरूर करना चाहिए। और आपको लग रहा है कि मैं कर भी सकता हूं, तो तब जरूर करना चाहिए। तब तो पीछे हटना ही नहीं चाहिए। लेकिन आप विवश हो। आप प्रयास किए, नहीं हो पा रहा है, तब बात अलग है। फिर आपका कोई न कोई आपकी मदद कर ले। यह भी बात आपको बता दूं। यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है। जब आप किसी भी कार्य के लिए पूरी तरह प्रयास करते हो, और आपसे विवश हो जाते हो, लाचार हो जाते हो, नहीं होता है, तो कोई व्यक्ति आकर आपकी मदद कर देता है। जैसे मान लीजिए आप कोई बोझ उठा रहे हो, आप बड़े परेशान हो, और उठा-उठा के नहीं उठा पा रहे, तो कोई व्यक्ति देख के आता है और कहता है, मैं उठवा देता हूं। कोई व्यक्ति रोड पर गिर जाता है। उस समय लोग कुछ नहीं देखते हैं। उसको गोद में उठा के उसके घर तक, या हॉस्पिटल तक पहुंचाते हैं। पहुंचाते हैं कि नहीं पहुंचाते। आपने ऐसा दृश्य देखा भी होगा, या किया भी होगा। और अगर वही व्यक्ति सामर्थ्यवान होता, और कहता मुझे ले चलो, आप ले जाते? अगर वही व्यक्ति नहीं गिरा होता, और वह बोलता कि मुझे ले चलो, मेरे घर तक छोड़ दो, गोद में उठाकर आप छोड़ते? कारण पूछते। क्यों? बोल देता, ऐसे ही, मैं स्वस्थ हूं, जा सकता हूं, लेकिन मुझे गोद में उठा के आप छोड़ दो। छोड़ोगे नहीं। लेकिन अगर वह डोल नहीं पा रहा है, तो जरूर आप किसी तरीके से उसकी मदद करो। कि ठीक है, मैं आपको आपके घर तक तो पहुंचा दूंगा। यह मानव का कर्तव्य है। यह करेगा ही।

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वीडियो: अपनों की कुटिया में रहने के नियम साधक के लिए सबसे जरूरी बात क्या है ? · 2024-12-31