आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P5-0074 · भाग 5

भगवान और इष्ट के भजन करते हुए क्या आत्मज्ञान संभव है? कैसे?

देखो, आत्मज्ञान तभी संभव है जब आप ईमानदारी और सत्कर्म अपनाते हो। और बाकी सब सहायक है। अगर ईमानदारी आपने नहीं अपनाई तो आत्मज्ञान संभव है ही नहीं। ईमानदारी ही आपको सत्य तक ले जाएगी, वह भी सत्कर्म के साथ। क्योंकि पिछला सत्कर्म के द्वारा कटेगा। ईमानदारी अगर अपना ली तो नया बंधन बचेगा नहीं। पिछला समाप्त होगा। आप सत्य तक पहुंच जाओगे। और बाकी, आप अगर ईमानदारी और सत्कर्म नहीं अपनाए, तो आप कुछ भी करो, आपके पतन का कारण ही बनेगा। चाहे पूजा पाठ हो, तप हो, कुछ भी करो, वह आपके पतन का कारण बनेगा। इसलिए कि आप उसके द्वारा कुछ ऊर्जा ग्रहण करोगे। ऊर्जा जाग्रत होगी, और वह आपके विनाश में लगेगी। तो इस बात को पूरी तरह समझ लो। ईमानदारी के साथ सत्कर्म अपना के अगर कुछ भी कर रहे हो, तो सब सहायक है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 9 अगस्त 2026 · 2026-08-09