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प्रश्नोत्तर P5-0024 · भाग 5

(साधिका) जीव हत्या / हलाला देखकर दुख होता है — हम क्यों नहीं रोक पाते? क्या गर्दन रखकर बलि रोकें? सोशल वर्क कैसे करें?

उस लायक बनो, फिर रोको; प्रयास करो। रोकने के लिए सामर्थ्य-प्लानिंग चाहिए। मुस्लिम-हिंदू की बात कहाँ से आ गई — मंदिर में भी बलि दी जाती है। आँखें मूंद मत लो; जाके काम करो। कालिदास वाली बात — बलि की जगह अपनी गर्दन रख दी। आँखें खुली हो तो पहुँच जाना। पहले आत्म कल्याण करो। कहना आसान है; करने की बारी पर पता चलता है। चिपको आंदोलन जैसा डेडिकेशन — जो चुभ रहा है उसके लिए काम करो। प्रायोरिटी पहले आत्म कल्याण है। सोशल वर्क के बारे में दिमाग में घुस जाता है कि दूसरों के लिए कर रहे हैं — सब कुछ अपने लिए करते हैं। भगत सिंह ने शिद्दत से किया; शिद्दत से करोगे तो खुद भी हो जाएगा। कफ़न लोग दे देंगे — तुम बस मरो; त्याग-बलिदान करो। एक जीव बचाना है तो जान पर खेल सकते हो; लेकिन हजार बचाने के चक्कर में एक-एक कटते रहेंगे। सही-गलत में कहाँ फँसना — आत्मिक कल्याण कर लो।

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वीडियो: अगर भक्त न हो तो भगवान का क्या होगा ? क्या भगवान भक्त पर निर्भर हैं ? #bhakt #bhagvan · 2025-07-17