आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P4-0181 · भाग 4

(वही साधिका) आप (शरीर की सेवा का) सवाल मल-मूत्र और लकवे जैसी बीमारी तक क्यों ले गए? हर बुखार-खांसी में तो ऐसा नहीं होता।

आपने बीमारी तो बताई — लकवा मार जाए तो क्या करोगे? भाई, लकवे में तो मैं तो आपकी स्थिति को जांचूंगा। तो हद तक लेके जाएंगे ना क्वेश्चन को — मैं तो आपको आखिरी तक लेके जाऊंगा; मारने के बाद तो फाइनल ही बताऊंगा ना भाई, क्या बचेगा। हर बुखार-खांसी में थोड़ी ना बोलेंगे — (तब तो) पता ही नहीं चलेगा ना। जब तक अति तक नहीं करेंगे, (पता नहीं चलेगा)। हमें तो आपकी स्थिति को समझना है ना, आपके स्तर को आपको दिखाना है ना, तो फाइनल बताएंगे तभी (तो) आप बताओगी ना। आपने बीमारी ऐसी बता दी, (तो) बताना पड़ेगा ना। और संभावना भी तो है — ऐसा तो नहीं कि नहीं है; जिस बीमारी को (आपने) बताया, क्या (उसकी) संभावना नहीं है? मेरे साथ भी हो सकता है, आपके साथ भी हो सकता है।

सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें

वीडियो: आखिर मेरा कल्याण कैसे हो ?#योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-30