प्रश्नोत्तर P4-0168 · भाग 4
(वही साधिका) जो साधक आत्मिक कल्याण के लिए आया हो पर गुरु को जांचने में लग जाए — जैसे गोयल जी ने कहा कि मैं जांचूंगा — उसके बारे में आप क्या कहते हैं?
अब जैसे गोयल जी हैं — तो गोयल जी ने कहा कि मैं जांचूंगा; (किसी ने कुछ कहा था और कहा) अगर (वैसा) निकला तो मैं वापस (घर) चला जाऊंगा। तो मैंने कहा — गोयल जी, जितना उसने कहा है, वो तो कम ही बताया होगा, क्योंकि सामने वाला कम ही बताएगा ना, उसने कुछ ही देखा होगा — उससे भी ज्यादा है; अभी जाओ। क्योंकि गोयल जी को हम आत्मिक कल्याण में ही लगाना चाहते थे — काहे को मुझे जांच रहे हो? मैं क्यों बोला? क्योंकि यार, तुम इसमें लगो, अपने आप में लगो, क्या फालतू मुझे जांचोगे? मैं कह रहा हूं, जितना उसने कहा, उससे ज्यादा है; तुम्हें जाना है तो अभी जाओ। क्या फायदा, जांचने में ही दो-चार साल लग जाएं — क्योंकि जांचने में समय जाएगा ना आपका। उसने तो कम ही बताया होगा, क्योंकि सामने वाले को पूरी तरह थोड़ी ना पता है — कुछ ही देखा होगा, वो भी चोरी-चोरी देखा होगा। तो मैं तो कह रहा हूं उससे ज्यादा है, अब बोलो क्या करना है? तब उनको समझ में आया, बोले — नहीं, अब तो मार के भगाओगे तो भी नहीं जाऊंगा। तो बोला — हां, इसलिए कि आप लग जाओ यार अपने आप में, क्या जांचोगे मुझे? मुझसे पूछ लो — और मैं कह रहा हूं, जितना मेरे बारे में कोई बोल रहा है, उससे ज्यादा है। मुझसे भी मत पूछो, आप वहां से यहां तक भी मत आओ, क्योंकि उतना भी समय बर्बाद मत करो। जांच करके गिनीज बुक में नाम करना है? तो वही करवा लो गिनीज बुक में अपना नाम। मैं नहीं चाहता आपके जीवन का समय बर्बाद हो। मेरा कहना है — आप जिसके लिए आए हो, वो काम करो। मैंने आपको ज्ञान दिया है, (अपनी) पर्सनल लाइफ पे अधिकार नहीं दिया है, व्यक्तिगत जीवन पे अधिकार थोड़ी दिया है। आप भी तो ज्ञान के लिए आए हो ना, (मेरी) व्यक्तिगत जिंदगी (जांचने) थोड़ी आए हो — तो फिर जांचने की बात कहां से आ गई? (वो आए तो थे पूरी तरह रहने के लिए, अपने आत्मिक कल्याण के लिए) — आप इसे गहराई से समझिए कि हम दो चीजों को लेके आए — पूरी तरह रहने भी आए अपने आत्मिक कल्याण के लिए, लेकिन अब ये काम पीछे चला गया, और जांचना आगे चला गया, जांच पहले (हो गई)। तो मैं इसलिए आपको बोला कि जितना उसने बोला, उससे ज्यादा है — क्योंकि आप मुझे कभी नहीं जांच सकते। (एक दिन ये भी मुझे देख रही थीं) — मैंने फील किया, उस जांचने में जिंदगी चली जाएगी। अभी तो (आप) जांच ही नहीं पा रहे हो कि हम कितने फंसे हैं — आप अपने साथ रहते हो, फिर भी — तो आप सामने वाले को कैसे जांचोगे? वो भी आपसे योग्य है; वो भी अयोग्य होता, तो एक बार प्रयास भी करते। आप जिसके चरणों में माथा टेक दिए, उसको क्या जांचोगे? उससे तो लाभ ले सकते हो। ये नासमझी कितना गिराती है — बहुत ज्यादा गिराती है।
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वीडियो: आखिर मेरा कल्याण कैसे हो ?#योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-30