प्रश्नोत्तर P4-0163 · भाग 4
(कुटिया में साधिका ने बुल्ले शाह की कहानी सुनाई — गुरु के आदेश से शादी में गया, गुरु भाई से बात नहीं की, गुरु ने आश्रम में आने से मना कर दिया, और 12 साल बाद किन्नर बनकर नाचते हुए गुरु को रिझाया।) बुल्ले शाह की गलती तो बस इतनी थी कि बात नहीं की — फिर गुरु को उसे वापस अपनाने में 12 साल क्यों लगे?
गुरु तो अपनी स्थिति से अपनाएगा ना। और जो स्थिति उसकी पहले थी, वो उसकी गलती के कारण इतना बैक चला गया था। लेकिन गलती क्या थी? सिर्फ बात नहीं किया। आप लोगों के समझ से, अगर आप लोग खड़े होते तो बोलते — मैंने गलती क्या किया, बात ही तो नहीं किया! वो कहेगा — जरा सी गलती है भाई। 12 साल अथाह मेहनत के बाद गुरु अपनाता है। और अपनाने के पहले तुम उस लायक हो कि नहीं हो, वो अनेक तरह से आपकी भी तो परीक्षा लेगा।
दिन, महीना छोड़ो, साल लग जाएं — पूरी तरह वो तुम्हें स्वीकार कर ले, वो क्षण तुम्हारे कल्याण का पक्का हो जाएगा; बस वहीं तक मेहनत करनी है। अब वो एक दिन लगता है कि 20 साल लगता है, वो आपके ऊपर है। जैसे गुरु के स्वीकार करने में कितने साल लग गए? 12 साल। गुरु स्वीकार तब करेगा जब आपका (वैसा) स्तर होगा, ऐसे स्वीकार थोड़ी ना करेगा। दो-चार दिन भूखा (बैठा) रहा गेट पे — उसे पता चल गया कि अभी तो (ये) उठ के भाग जाएगा, वो भाग ही गया। 12 साल लग गए उसे योग्य बनने में। ये 'सुबह का भूला शाम को वापस आ जाए' — ये सिर्फ सुबह-शाम नहीं थी, उस सुबह-शाम में 12 साल थे।
अब आपने कहानी सुनाई — तो उसमें गुरु ने पहले कहा कि जाओ घर पे, फिर (अपने) शिष्य को क्यों भेजा? क्या कोई काम था? वो ये जांचना चाहता था कि उसके अंदर प्रेम है कि नहीं। तो पता चला उसके अंदर प्रेम नहीं है। (तो गुरु ने कहा) अब उसे आने मत देना — क्योंकि मैं उससे प्रेम करता हूं, लेकिन जब तक उसका प्रेम जागृत नहीं होगा, उसकी उपलब्धि नहीं होगी। प्रेम पैदा कैसे होगा? अब मुझसे इसका वियोग होगा, तब पैदा होगा। तो गुरु ने वियोग किया। और जब वियोग हुआ — गुरु तो प्रेम करता था — तो उसकी कमी वो बर्दाश्त ही नहीं कर पाया। तो उसने (कहा) — गुरु मुझे बस स्वीकार कर ले; आत्मज्ञान चलो उधर गया, ब्रह्मज्ञान उधर गया, उपलब्धि उधर गई, अब मैं गुरु के बिना नहीं रह पा रहा हूं, तो गुरु मुझे स्वीकार कर ले। गुरु ने तो स्वीकार किया ही था — तू उस लायक नहीं था तो भी स्वीकार किया था — लेकिन तू परीक्षा में फेल हो गया। तो गुरु ने अस्वीकार किया, और (फिर से) स्वीकार करने में 12 साल लग गए; और उस 12 साल में वो योग्य भी हो गया, उसके अंदर से प्रेम जागृत हो गया। नहीं तो ये कहानी भी समझ में नहीं आती। (ये कहानी) मुझे कई बार सुनाई, मैं आज इस पे बोल रहा हूं — मैंने आज तक सिर्फ सुना, बोला कभी नहीं।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: आखिर मेरा कल्याण कैसे हो ?#योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-30