प्रश्नोत्तर P4-0140 · भाग 4
(कुटिया में सन्यासी महाराज जी) गुरु जी, कल आप सिद्धेश्वर गए, वीडियो में देखा। आपने कहा था कि आपकी खोज की आखिरी जगह वहां थी — क्या उपलब्धि उस स्थान पर हुई? क्या वह स्थान उस पल का साक्षी है?
वहां उपलब्धि नहीं हुई — मेरा थकना वहां हो गया। वहां से तो मैं रो के निकला, थक-हार के; वहां से निकला, हाईवे पे आके रोने लगा कि अब कहां जाऊं। मतलब मेरी खोज वहां पूरी नहीं हुई, वहां से मैं थक गया। एक बात बताओ — खोज कहां पूरी होगी? इस पिंड में एक ही जगह आपको आत्मज्ञान होगा, जिस दिन आप इस जगह पे आ जाओगे। जब बाहर से आप मुक्त हो जाओगे, तभी आप इस पिंड में आ पाओगे, और इस पिंड में ही आत्मज्ञान होगा। (क्या वह स्थान उस पल का साक्षी है —) नहीं, नहीं है। जगह इसके लिए है ही नहीं; इसके लिए कहीं फिक्स जगह नहीं है कि कहा जाए फलाना जगह फिक्स है। फिक्स आपके अंदर एक ही जगह है — बस यहां। बस बाहर से तुम थक जाओ; बाहर कहीं स्थान फिक्स नहीं, फिक्स यहां है। अब बाहर से छूटने के लिए कुछ करना पड़ेगा — तो अपने आप को थका दो।
दुनिया बाहर खोज रही है, लेकिन आदत पड़ी है ना, क्या करोगे — उसकी भी गलती नहीं है, बताया गया है कि बाहर है, तो वो क्या करे। सबसे बड़ी गलती तो यही है। अब तो हो गई — गलती से तो हम पैदा हो गए हैं। सामने वाले की पैदा करने की इच्छा थोड़ी ना थी; हम तो हो गए। मैं अपने माता-पिता का नौवां लड़का — दो मर गए — तो हमारी कोई मन्नत थोड़ी ना थी, कोई घंटी थोड़ी ना बजाई कि मंदिर में दे दो। तो बाबा, गलती से हम लोग आ गए हैं। अब एक काम करो — गलती से अपना कल्याण कर लो, एक गलती और कर लो। हमने तो वो गलती कर ली, अपना कल्याण कर लिया। जितना मां-बाप ने सिखाया, मैंने वो नहीं किया — खा-कमा के (जीने) के लिए तो हम पैदा ही नहीं हुए हैं। तो एक गलती और कर लो। देखो ना, दूसरे के बच्चों को कहते हैं कि आपने अपनी सात पीढ़ी तार दी, और खुद का निकलता है तो कहते हैं भूत चढ़ा है। तो ये आप आए हो ना, तो एक गलती है आपके परिवार के लिए — लेकिन यह गलती करो। मैं कहता हूं, यह गलती कर लो। मैं गलती करके यहां आया। अगर मैं अपने परिवार का मानता, तो बंगला बनाता, गाड़ी ले के घूमता, दो-चार पैदा कर देता। आपका परिवार थोड़ी चाहेगा कि ये गलती करो — लेकिन आप ये गलती करो।
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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25