प्रश्नोत्तर P4-0096 · भाग 4
(लाइव) योगी जी प्रणाम। आत्मिक चिंतन में विचारों और भाव में न बहना है, न रोकना है। पर यह तटस्थ भाव भी तो हम ही बना रहे हैं। इस तटस्थ भाव से कर्ता भाव बना रहेगा क्या, या धीरे-धीरे विलीन हो जाएगा?
कर्ता भाव तभी तक है जब तक आप अनुमान लगा रहे हो। अनुमान लगाना छोड़ दो, कर्ता के भाव से आप मुक्त हो जाएंगे। और आत्मिक चिंतन में इतना करना है कि मैं कैसे मुक्त हो जाऊं, मैं अपने आप को कैसे छुड़ा लूं।
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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25