प्रश्नोत्तर P4-0081 · भाग 4
(लाइव) योगी जी नमन। जब एकांत में बैठते हैं तब विचार, वासना, कामना ही आती है। तो इसी का यूज़ करके हम कैसे निर्विकार हो जाएं — कृपया मार्गदर्शन कीजिए।
नहीं, देखना है कि आती क्यों है। क्योंकि जैसा हमने किया है, वही सब आता है। तो देखना ये है कि मेरे द्वारा क्यों हुआ, मैंने क्यों किया — क्यों में जाना चाहिए, क्यों हुआ। एक समय ऐसा आएगा जब आखिरी में जाओगे तो 'क्यों' हट जाएगा, 'हुआ' रह जाएगा। 'हुआ' रह जाएगा तो 'हुआ' के बाद पता चलेगा इस कर्म का परिणाम क्या है। तो फिर आपको पता चल जाएगा, फिर अपने आप को निकाल दोगे।
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वीडियो: 25 जनवरी 2026 रविवार प्रश्नोत्तरी#योगी · 2026-01-25