प्रश्नोत्तर P4-0058 · भाग 4
(लाइव) गुरु जी प्रणाम। जानने (की आदत) से कैसे छुटकारा पाया जाए? पता होता है कि यह विचार गलत है, पर उस विचार की पहेली सुलझाने की आदत सी हो गई है।
हां, तो या तो जानकर मुक्त हो जाओ, या तो यह समझ में आ जाए कि जानने के लिए कुछ नहीं बचा, जानने के लिए कुछ है नहीं। क्योंकि जिसे आप जान रहे हो, वो प्रतिपल बदल रहा है, तो आप उसे क्या जानोगे? तो आप यह समझिए कि जिसे मैं जानना चाहता हूं, वो तो प्रतिपल बदल रहा है, वो तो कभी जाना ही नहीं जा सकता। तो जितने में मैं जी सकूं, जितने में मैं अपनी जरूरत पूरी कर सकूं, उतना मेरे लिए जानना जरूरी है। बस — जितने में मैं अपने बंधनों से अपने आप को छुड़ा लूं, उतना जानना जरूरी है; बस, और कुछ नहीं।
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01