प्रश्नोत्तर P4-0035 · भाग 4
(लाइव) योगी जी प्रणाम। आप प्रत्यक्ष ज्ञान में ईमानदारी और सत्कर्म अपनाने को कहते हो। सत्कर्म तो समझ में आ गया; कृपा करके ईमानदारी को समझा दीजिए।
और भी वीडियो देखो; ईमानदारी के बारे में मैंने बहुत समझाया है — लेनदेन, उठने-बैठने (में)। अगर आप किसी के लिए शब्दों का संबोधन कर रहे हो, तो आपने उसे एक शब्द दिया, तो एक शब्द उसके पास गया, तो वह शब्द आपके पास भी है। तो क्या सेम वही शब्द है, या पता चला कि आपने शब्द अलग रख लिया और उसे अलग दे दिया? यह भी बेईमानी है। आप जिन शब्दों को दे रहे हो — देखो, आपने जैसे ही उसे एक शब्द दिया, एक शब्द वो आपके अंदर भी है — तो आप देखो कि असली ही दे रहे हो कि नहीं। पता चला कि असली रख लिए और नकली दे दिए, तो आप फंस गए। जैसा है, वैसा दे पा रहे हो कि नहीं?
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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01