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प्रश्नोत्तर P3-0196 · भाग 3

(कुटिया में साधक) आपने एक सत्संग में बोला था कि अध्यात्म में नर्क मांग लो — नर्क की लाइन में लग गए तो धुलना शुरू हो जाओगे। इसका अर्थ समझाइए।

नर्क का मतलब दुख। हम नर्क किसे समझते हैं? दुख ही ना? चाहे वह सुख हो चाहे दुख हो — सुख हम पाना चाहते हैं, दुख नहीं। तो अगर आज तक देखा जाए तो हमने सुख ही भोगने की इच्छा रखी है, दुख कभी नहीं भोगा है। तो ये दुख कौन भोगेगा? अगर आपने सुख भोगने की इच्छा रखी है और दुख भोग ही नहीं रहे हो, तो आप कभी छूट नहीं पाओगे। जब से समझने लायक हुए, सुख ही भोगे। अब एक काम करो — दुख अपना भोगो; कहो, मेरे किए गए कर्मों का परिणाम मुझे दो। क्योंकि दुख को आपने हमेशा अपनी बुद्धिमानी से हटाया है, दबाने का प्रयास किया है। तो दुख मतलब नर्क। और दुख में आप (अपने साथ) होते हो; सुख में भिन्न-भिन्न लोग होते हैं, दुख में सब साथ छोड़ भी देते हैं, दुख अकेले झेलना पड़ता है। और दुख में अपने आप को पाते हो। वो वीडियो फिर से देखो; जब तक समझ में ना आए, तब तक आप देखते रहो।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01