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प्रश्नोत्तर P3-0187 · भाग 3

(वही साधिका) क्या इच्छा हमारे लिए हेल्पफुल भी नहीं है — उठने में? हम भी तो एक इच्छा लेकर यहां बैठे हैं; कोई घर से (यहां के लिए) चला, तो वह भी इच्छा लेकर चला ना। इसे क्या कहेंगे?

आप इच्छा छोड़ने के लिए बैठे हैं। आप इच्छा को छोड़ना चाहते हो, अपने मूल में आना चाहते हो। मूल में आना कोई इच्छा नहीं है। राग-द्वेष, मोह-आसक्ति, इच्छा-अपेक्षा, मेरा, कर्ता — यह आप छोड़ना चाहते हो, क्योंकि आपने इसे पकड़ा है और इससे आप परेशान हो, ग्रसित हो। आप यहां इच्छा लेकर नहीं बैठे हो। वही तो कह रहा हूं — मैं मूल में आना चाहता हूं; (इसमें) इच्छा है ही नहीं। मैं तो अपने आप में स्थिर होना चाहता हूं। अगर मुझे इसके बाहर कुछ चाहिए होता, मेरे अलावा मुझे कुछ चाहिए होता, तो इच्छा होती। मैं तो अपने आप में स्थिर होने आया हूं कि मैं अपने आप में कैसे हो जाऊं। तो आप यहां इच्छा से मुक्त होने आए हो, इच्छा से अपने आप को छुड़ाने आए हो। और इच्छा क्या है — राग-द्वेष, मोह-आसक्ति, इच्छा-अपेक्षा, मेरा, कर्ता; योग्यता से ज्यादा पाने में सब होता है। आप इससे छूटने आए हो। आप इच्छा लेके नहीं आए हो, इच्छाओं से मुक्त होने के लिए आए हो। आप अपने आप में स्थिर होना चाहते हो — ये कोई थोड़ी इच्छा है। इस शब्द को हम इच्छा नहीं बोल सकते। मैं कह सकता हूं कि यहां शब्द खत्म हो गया, यह निःशब्द हो गया। इसी को कहा जाता है कि तुम उस जगह आकर खड़े हो जाओगे जहां आपके लिए कोई शब्द ही नहीं होगा, सिर्फ आप होगे। तो आप यहां पर अब कहोगे कि यह क्या है — तो यह बात खत्म हो गई; यहीं पर बात खत्म हो जाती है। और यहीं के बाद ही परमानंद घटित होता है — जब आप इससे छूट जाते हो। इसके बाद शब्द खत्म — यह क्या है, कुछ नहीं, कुछ बोल ही नहीं सकते। क्योंकि बोला तब जाएगा जब कुछ बाहर का होगा, जब आपसे कोई भिन्न हो, उसके बारे में आपसे बताया जाएगा। लेकिन आप ही हो, तो फिर आपके लिए आपको क्या बोलना? तो यहीं पर परम आनंद घटित होता है, यहां व्यक्ति निःशब्द हो जाता है — ये क्या है, कुछ नहीं, बात खत्म हो जाती है। तो अब मेरी कोई इच्छा नहीं है, और जितना पीछे का है, भैया, हम उससे मुक्त होना चाहते हैं। अब मेरी कोई इच्छा नहीं है, मेरी कोई कामना नहीं है। अगर आपके अलावा और कोई कामना होती, तो आप यहां नहीं आते; और धोखे से आ जाते तो चले जाते — और आपने ऐसे लोगों को देखा भी। जैसे अभी मैं आपको बोल दूं — आप यूएसए में रहते हैं। अब जितना भारत में जातिवाद का खेल है, वहां है क्या? वहां क्यों नहीं है, यहां क्यों है? पृथ्वी तो एक ही है। वहां ऐसा है कि यह जात वाले ऊपर बैठेंगे, ये नीचे बैठेंगे? वहां क्यों नहीं? क्योंकि वहां के बच्चों को ऐसी जानकारी नहीं दी गई, तो वो लोग इससे ग्रसित नहीं हैं; लेकिन हम लोग इससे ग्रसित हैं। वो भी तो इसी पृथ्वी पर रह रहे हैं। सबके पास सेम गाड़ियां हैं, सेम घर; जातपात का ऐसा कोई नियम नहीं कि ये समाज के लोग ऊपर बैठेंगे, ये समाज के लोग इनको प्रणाम करेंगे, इनसे झुकेंगे। अब भारत में कूट-कूट के भरा है — क्यों भरा है? वहां क्यों नहीं? क्योंकि वहां के बच्चों को ये सब जानकारी नहीं दी जा रही।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 1 मार्च 2026 #योगी · 2026-03-01