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प्रश्नोत्तर P3-0097 · भाग 3

एक माता जी: मैं कई बार सोचकर पछताती हूं कि यह सब — सही-गलत क्या है, मैं कहां हूं — हमें हमारे परिवार ने क्यों नहीं बताया? किसी को कुछ पता हो तो बताना तो चाहिए।

अगर बता दें — जैसे राम का नाम सत्य है, यह बता दें — तो फिर आप उनके काम नहीं आओगे, यूज़ कैसे होगी? यहां एक दूसरे को यूज़ कर रहे हैं। दूसरे का बेटा अगर महात्मा बने तो प्रणाम करते हैं और कहते हैं सात पीढ़ी तार दिया; लेकिन खुद का बेटा उस तरफ जाए तो कहेंगे भूत पकड़ लिया, विवाह कर, शादी कर। लोग इसलिए नहीं बताते — यूज़ करने के लिए। लास्ट में बताते हैं, जब आप यूज़ के लायक नहीं रहतीं, जब कंधे पर आ जाती हो, बोझ हो गईं — तब कहते हैं राम नाम सत्य है, सबकी यही गति है। जब आप इस शरीर से निकल गए और आपने कहा कि यह मैंने क्या कर दिया, फंस गए — तब ऊपर से वह जीवात्मा कहता है, पहले क्यों नहीं बताया, यह बात तो मुझे बचपन में बताने वाली थी। लेकिन बचपन में बता देते तो आप उनके उपयोग में नहीं आते। अपने बच्चों को लोग इसलिए नहीं बताते कि कहीं वैराग्य न हो जाए, शादी न करे, चला न जाए। लेकिन यह कितनी बड़ी बेईमानी है। एक मां-बाप अपने बच्चों से कम से कम बता तो दें कि बेटा इस संसार में मैं तो उद्धार नहीं कर पाई, लेकिन तू अपना उद्धार कर ले — भले वह बाद में विवाह करे, लेकिन बता तो दो। नहीं बताते — बहुत बेईमान हैं; माता-पिता बेईमान होते हैं, तभी नहीं बताए। कोई चले या न चले, पता तो चल ही जाता है। आज गुरु नानक को सब प्रणाम कर रहे हैं, लेकिन वही गुरु नानक अपने माता-पिता के लिए आखिर तक निठल्ले ही रहे, क्योंकि वे उनके यूज़ नहीं हो पाए — पर दुनिया के लिए महान हो गए। आपको इसीलिए नहीं बताते कि पता चल जाएगा तो आप उपयोग नहीं होंगे, बचकर निकल जाओगे। रोकना नहीं है — शादी करना बच्चों की मर्जी है — लेकिन सलाह तो देना चाहिए कि बेटा मैं करके फंस गई, तू मत कर।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 14 जून 2026 #योगी · 2026-06-14