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प्रश्नोत्तर P3-0090 · भाग 3

(उसी प्रसंग में) अगर इस जन्म में मुझे ऐसा कोई विकार ध्यान में नहीं, तो फिर विकार कहां से आया — हमें पता ही नहीं चलता?

कभी-कभी हमें पता नहीं होता, लेकिन हम इतना प्रोफेशनल जीते हैं कि सामने वाले निर्दोष का अपमान कर देते हैं और हमें पता भी नहीं चलता। लेकिन कहीं न कहीं उसकी बद्दुआ तो लगी, उसे पीड़ा तो हुई। प्रोफेशनल आप हो, वह नहीं था; समझ आपके पास थी, उसके पास नहीं थी। मुझे पता है, उसे नहीं पता, उससे गलती हो गई और उस गलती पर मैं उसे डांट रहा हूं — तो उसकी अंतरात्मा से आपके लिए बद्दुआ निकलेगी ही निकलेगी। आपको अपनी जगह सही लग रहा है, लेकिन हो नहीं, क्योंकि उसे तो पता भी नहीं था कि ऐसा हो जाएगा। जैसे उस बालक का भाव थोड़े ही था कि मैं इनका बैग नहीं लूंगा। अगर बनाया हुआ भाव होता तो कहने के बाद कोई भी बहाना मार देता कि मेरे पैरों में झुनझुनी चढ़ी है — झुनझुनी को चेक भी नहीं किया जा सकता, उसकी कोई मशीन नहीं। वह बच भी सकता था; पर उसने स्वीकार किया, तो वह सच में आगे बढ़ना चाह रहा है। उसकी प्लानिंग थोड़े थी। ऐसे ही हमारी समझदारी, हमारे प्रोफेशनल होने ने बहुत कुछ करवा दिया। हमने बहुत निर्दोष लोगों को बहुत कुछ कह दिया, लगा कि मैं सही हूं, लेकिन उसे हम समझ नहीं पाए। यही तो समझदारी है, बुद्धिमानी है — सामने वाले की स्थिति देखकर बात करो, क्योंकि ऊपर आप हो, वह नहीं। पढ़े-लिखे ज्यादा कर बैठते हैं — कहेंगे गंवारों से बात नहीं करना, लेकिन स्टेशन पर जाकर गंवार से ही रास्ता पूछते हैं। एक गंवार जिसे आप समझते हो, वह समाज की ज्यादा हेल्प करता है, रास्ता ज्यादा बताता है — उसके पास टाइम है और बताने में उसका स्तर उठ रहा है। प्रोफेशनल आदमी के पास टाइम ही नहीं, कार से जा रहा है; साइकिल वाला देख रहा है कि भाई कहां जाना है। मेरी क्लास की घटना — अंग्रेजी के शिक्षक कॉपी चेक कर रहे थे, मैं बीमार था इसलिए एक लेसन नहीं लिख पाया, सच बोला, फिर भी उन्होंने मार दिया। घंटी के बाद पेड़ के पास मुझे खूब उल्टियां हुईं और मैंने उन्हें खूब गाली दी, और फिर उनका लेसन कभी नहीं लिखा। जिम्मेदार कौन? वह शिक्षक — उसे जांचना चाहिए था; मुझ पर विश्वास नहीं था तो गार्डियन को बुलाकर पता करता, फिर देखता कि मैं दंड का अधिकारी हूं कि नहीं। एक सच्चा बालक इतना कठोर बन गया। एक निर्दोष बालक से उसके लिए कितना श्राप निकला होगा! आप अपनी ताकत के बल पर दंड दे रहे हो — पूरी इंक्वायरी करो, बच्चे की क्या स्थिति है, मनोदशा, मानसिक स्थिति क्या है। कभी-कभी हम पावर का दुरुपयोग कर देते हैं। ऐसी बहुत गलतियां हो जाती हैं जिनकी हमें बहुत बद्दुआ मिलती है और हम समझ नहीं पाते।

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वीडियो: रविवार प्रश्नोत्तरी 14 जून 2026 #योगी · 2026-06-14