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प्रश्नोत्तर P3-0061 · भाग 3

साधना में आप ऊपर वाले से कहते थे — मुझ पर कृपा मत करना, खुद खोज लूंगा। हम छोटी चीजों पर भी भगवान कृपा कर कहते भिखारी क्यों हैं? मार्गदर्शन करें।

कहीं पूरी मेहनत उसी तरफ नहीं लगा रहे; मेहनत कहीं और। उनके लिए पूरी तरह चले हो तो कृपा क्यों चाहिए? कृपा करें तो सब पे कर दे — अकेले मुझ पर क्यों? व्यक्तिगत कृपा करे तो परमात्मा नहीं हो सकता। कर्म से हुआ तो कृपा कहां? कृपा मांगना मतलब पूरी तरह कर्म/मेहनत नहीं कर रहे। पूरी मेहनत करो तो कृपा मांगते ही नहीं — कर्म पहुंचा देगा। अकेले कृपा और लायक काम न हो तो समझ से परमात्मा भी नहीं। उसके हाथ में होता तो कोई अज्ञानी/दुखी होता ही नहीं। हाथ में नहीं तो परेशान क्यों करें? माता-पिता से पास करवा दो जैसे — विवश करना, वो करवा भी नहीं सकते। कृपा मांगने की जरूरत नहीं।

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वीडियो: पार्ट 1 कैसे कहूं ,तेरी कृपा भी नहीं चाहिए ? योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-03