प्रश्नोत्तर P3-0043 · भाग 3
अध्यात्म में 100% लगाने पर भी बाहर कुछ नहीं हो रहा — उदासी, बोरियत, बेचैनी; गुरु कहे खुद जांचो तो असहाय। ये स्थितियां बनती हैं? सलाह?
अध्यात्म मतलब अपनी (बाहरी) समझ से मुक्त होना; स्व में स्थिर। स्थितियां बनती नहीं — छूटती हैं। मोह-आसक्ति-इच्छा-अपेक्षा-कर्ता से मुक्त। यहां कुछ मिलेगा नहीं; रस खत्म। जैसे-जैसे अपने में रहोगे उदास-घुटन-बेचैनी — पिछला जीवन खींचता। हर प्रश्न का उत्तर मिल रहा तो स्तर बढ़ रहा; मिलना भटकाव, मिलने से मुक्त होना। बोरियत = कहीं कुछ चाहिए। आनंद सीधा नहीं बढ़ेगा — कभी आनंद कभी घुटन; मूल में पहुंचने पर टिकेगा।
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वीडियो: मेरा हंसना और रोना क्या है ?योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-05