आध्यात्मिक प्रत्यक्ष ज्ञान · ऐप में खोलें

प्रश्नोत्तर P3-0026 · भाग 3

संसार में संघर्ष-कंपटीशन से पहुंचे; अध्यात्म में कंपटीशन नहीं पर कर्मबंधन उलझे यादें ताजा। ज्ञान ने काबिल बनाया देखने को — मटेरियल अभी भी वर्क करता है, रोष आता है। बारीकी से कैसे चलें कि रोष कम हो?

जब से समझ लायक हुए रसपान में जिए — शब्द गंध रस स्पर्श। इस मार्ग में रसपान नहीं मिलता, धीरे छूटते। वहां चापलूसी-बनावटी प्यार; अध्यात्म में नहीं मिलता — आदत पड़ गई थी पाने की। अटैचमेंट से हटते, अपने में होते। सच्चाई बताने वाले पसंद नहीं, झूठी तारीफ खोजते — अध्यात्म में ऐसे नहीं। रोष-गुस्सा आता है। गुस्सा पानी की तरह — कमजोर पर या प्रेम करने वाले पर बहता (जवाब नहीं मिलेगा)। गुस्सा ताकत-बल है; ज्यादातर निकाल देते। गुस्से में लाखों बर्बाद, वस्तु तोड़ — बल अच्छे काम में लग सकता था। गुस्सा किसी को गिराने में न लगे। सालों मेहनत की वस्तु एक झटके में — वैसा अध्यात्म में आगे जाकर झटके में गिरना न हो। सूझबूझ से सचेत जीवन। चौराहे पर जिज्ञासा — सही मार्ग आपकी तरफ बढ़ता है। सजगता हटे तो मूर्छित। 7 बजे के अंदर बंधे हो तो उपलब्धि नहीं।

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वीडियो: तेरे ज्ञान ने मुझे इस काबिल तो बनाया ।योगीजी_का_सत्संग · 2025-12-20