प्रश्नोत्तर P21-0108 · भाग 21
गुरु जी, मैं समझा हूं कि बीज में वृक्ष की तरह मेरा कल्याण भी ईमानदारी (100%), सत्कर्म और सत्संग से शुरू होगा, फिर ध्यान और समाधि घटित होंगे — तो धारणा-ध्यान-समाधि कैसे होती है, और सत्य और शिव की स्थिति अलग है या एक?
एक ही स्थिति है — सत्य में हो गए, अपने आप में स्थिर हो गए, वही आत्मज्ञान; दोनों एक ही हैं, और वहां से आपकी यात्रा शुरू होती है। धारणा बनानी है — जैसे एक मादा गर्भ को धारण करती है; जब तक धारण नहीं करती, तब तक किसी और की जरूरत है, आप उसे गुरु भी कह सकते हो। एक बार गर्भ धारण कर लिया, फिर उसे उचित तरीके से जीना है, और वो अपने आप मां बनने के करीब जाती है; जब पीड़ा होती है तो ऐसी स्थिति कि उसे कुछ पता नहीं — वो समाधि की स्थिति है, और कुछ समय बाद वो मां बन जाती है। वैसे ही साधक को धारणा बनानी है निर्विकार होने की; अगर निर्विकार होने की धारणा पक्की बना ली, तो अपने आप काम होने लगेगा, अपने आप ध्यान घटित हो जाएगा, फिर समाधि की स्थिति अपने आप आएगी। "धारणा, ध्यान, समाधि, तुम, ब्रह्म" — तुम्हारे द्वारा जो जाना जाएगा वो ब्रह्म; किसी और के द्वारा ब्रह्म को नहीं जाना जा सकता, वो परमात्मा स्वयं के द्वारा ही जाना जा सकता है।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: हरियाणा सोनीपत में पुनः सत्संग 19 जुलाई 2026 #याेगी · 2026-07-19