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प्रश्नोत्तर P21-0101 · भाग 21

गुरु जी, जरूरतमंद का पता कैसे चले? आज समाज में कोई किसी नाम पर, कोई शादी-ब्याह के नाम पर मांग रहा है — कैसे पता हो कि इसे सच में जरूरत है?

आप पता करके दो ना — पता करना आपका काम है। जरूरत भोजन की भी है, कपड़े की, मकान की, दवा की भी; शरीर अपनी पूर्ति अपने आप करने के लिए मिला है — अगर वो कर लेता है तो ठीक, नहीं कर पा रहा तभी तो मांग रहा है; और मेहनत कर ही नहीं रहा, तो देख लो। जरूरत का मतलब है कि आपको लगे कि इसे जरूरत है, तब करना; दुनिया में किसी का पूरा तो कोई नहीं कर सकता, तो जांचकर देखना आपका काम है। एक महाराज जी ने माचिस मांगने वाले को फट से दे दी; हमने पूछा इसका क्या करोगे, बोला खेत में आग लगाऊंगा — तो हमने माचिस वापस ली, कहा अपने घर से ले आ, क्योंकि उस आग से हजारों-लाखों जीव मरेंगे। जब आप किसी को ताकत दे रहे हो तो पूछ लो; अगर वो सदुपयोग बताकर दुरुपयोग कर रहा है तो उसका परिणाम वो भोगेगा। कोई जांच की मशीन तो है नहीं — जितना पता कर सकते हो, देने से पहले पता कर लो; लग रहा है देने लायक है तो दो, नहीं है तो मत दो — अपनी समझ से फैसला लो।

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