प्रश्नोत्तर P21-0088 · भाग 21
गुरु जी, आप कहते हो अपने तरीके से कुछ करोगे तो द्वेष आएगा — इसका क्या मतलब? अगर कोई हमारे तरीके से काम न करे तो भी तो द्वेष आएगा ना?
जब मैं कोई भी काम कर रहा हूं तो किसी के द्वारा ही कर रहा हूं, अकेले तो कर नहीं सकता; मेरे अपोजिट में कोई है। तो काम को काम के तरीके से करो — ना मेरा तरीका, ना उसका तरीका — तो राग-द्वेष नहीं होगा। अपने तरीके से करोगे तो भी राग-द्वेष होगा, उसके तरीके से करोगे तो भी। दबाव-संकोच पर काम मत करो। आपको कोई भी काम मिला है, आपने कोई काम लिया है, तो काम को काम के तरीके से करो, तो राग-द्वेष नहीं होगा, बंधन नहीं होगा, वही मुक्ति का मार्ग बन जाएगा; और पूरी ईमानदारी से करो, उसमें कुछ मिलावट मत करो। हर कार्य का खुद का तरीका होता है।
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