प्रश्नोत्तर P21-0028 · भाग 21
कोई सोचे कि मुझे गुरु नहीं बनाना, मैं भी आपकी तरह 12 साल अपनी व्यवस्था (सेविंग) करके भ्रमण करूंगा और खुद ठहर जाऊंगा — उसकी तुलना में गुरु के सानिध्य में रहने वाले साधक का क्या?
मैं तो गुरु की खोज कर रहा था — 2011 से आखिरी 2019 तक हमने गुरु की ही खोज की, कि कोई मुझे बता दे। ऐसे तीन लोग मुझे मिले जिन्होंने मार्ग बताया; एक ने तो बस इतना बोला कि भैया जल्दी मत करो — मुझे उतने की ही जरूरत थी। कच्चे फल पर कई पत्थर मारो तो वह फट जाता है पर गिरता नहीं, और पका फल बस एक हवा के झोंके से हिलकर गिर जाता है — मैं उनकी बात कुछ ही शब्दों में समझ जाता था। मुझे न किसी पर संशय था, न अपने आप पर; पता था एक दिन अपने लक्ष्य पर पहुंच जाऊंगा। जो अपनी व्यवस्था करके निकलेगा, वह तो राग-द्वेष में फंस जाएगा — रास्ते में बिना मतलब के लड़ाई-झगड़े हो जाते हैं, पता भी नहीं चलता राग-द्वेष कैसे पैदा हुआ। गुरु के सानिध्य में रहोगे तो गुरु होने नहीं देगा।
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वीडियो: मेरे भ्रमण की एक और जगह #योगी · 2026-01-27