प्रश्नोत्तर P21-0005 · भाग 21
इच्छा-अपेक्षा को समझकर छोड़ देना बहुत भगीरथ काम है — पर अगर स्व को जान लिया तो इच्छा-अपेक्षा वहां आ ही नहीं सकती, तो पहले स्व को क्यों न जानें?
बिना उम्मीद छूटे स्व को जाना ही नहीं जा सकता, यह क्यों नहीं समझ रहे हो? बिना मिटे बर्फ पानी नहीं हो सकता — बर्फ और पानी एक ही चीज है, तो उसका तार काट दो, कहीं से उसका कनेक्शन काट दो। उम्मीद छोड़नी पड़ेगी, और कोई रास्ता नहीं। स्व में सेटिंग मत करो।
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वीडियो: इच्छा अपेक्षा क्या है?इससे कैसे मुक्त होते है?(Freedom from Desire & Expectation) Explained in Hindi · 2026-03-07