प्रश्नोत्तर P20-0125 · भाग 20
"तुम्हारे जैसे कितने आए और कितने जाएंगे" — यह सुनकर डर लगता है, पसीना आ जाता है कि गुरु को मेरी जरूरत ही नहीं, तो मेरा कल्याण कहां होगा?
इस बात को गहराई से समझिए। जिस दिन आपको लग गया कि सामने वाला मेरा इस्तेमाल कर रहा है, इसे मेरी जरूरत है, उसी दिन तुम अहंकारी हो जाओगे और उसके बाद जाना ही जाना है। जब तक यह समझ रहेगी कि मैं अपनी जरूरत में, अपने कल्याण के लिए हूं, तभी यहां रुक पाओगे। कोई मेरे लिए कुछ नहीं कर रहा — वे ज्ञान को समझकर, फैलाकर अपना आत्मिक कल्याण करना चाहते हैं। मैं मेहनत की रोटी खाता हूं, मेरी कोई पर्सनल इच्छा नहीं, काम के अलावा कुछ करता ही नहीं।
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वीडियो: ऐसा क्या करूं, जो तेरी सेवा हो पाए ? #योगीजी_का_सत्संग · 2025-09-02