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प्रश्नोत्तर P2-0189 · भाग 2

धार्मिक भी और गृहस्थी भी अच्छे से निभाना चाहने वाला व्यक्ति कई बार धर्मसंकट में फंस जाता है — वह ऐसा निर्णय चाहता है जो सबके हित में हो, जिसमें उसका निजी स्वार्थ न हो, वह निर्लेप भी रहे और कर्तव्य भी निभ जाए; पर तय नहीं कर पाता कि क्या सही है। अच्छे सलाहकार भी आजकल मिलते नहीं — या चापलूसी करते हैं। ऐसे व्यक्ति को निर्णय कैसे लेना चाहिए?

या तो फैसला ले पाए, या अपने से योग्य व्यक्ति के सामने अपनी बात रखकर उससे फैसला मांगे कि अब मैं क्या करूं — ऐसा व्यक्ति खोजे जिसे सलाहकार कहते हैं, जो उचित सलाह दे पाए। अगर उचित सलाहकार नहीं मिलेगा, तो फैसला तो लेना ही पड़ेगा; स्थिति-परिस्थिति फैसला लिवा देगी। पहले फैसला आपके हाथ में रहेगा, (देर करोगे तो) फिर आपके हाथ से भी चला जाएगा। (जब मेरे हाथ में है, तो भाव शुद्ध रखना है कि मेरा कोई स्वार्थ, लालच नहीं, किसी को दुख नहीं पहुंचाना —) फिर जरूरतें फैसला करवा देंगी, क्योंकि उस फैसले में लोग भी हैं। आप नहीं दोगे, तो लोग दे देंगे फैसला — पहले आपका इंतजार करेंगे, फिर खुद ले लेंगे; ज्यादा देर तक फैसला आपके हाथ में नहीं रह पाएगा। तो देख लो — अगर (आपका फैसला) उनके हित में होता है, तो दे दो; नहीं तो इंतजार करो, वे फैसला खुद ले लेंगे। सिर्फ इंतजार करो।

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वीडियो: आखिर कब तक ये याद रहेगा ? #योगी · 2026-01-16