प्रश्नोत्तर P2-0155 · भाग 2
गुरु जी, मेरे घर वाले विवाह के लिए जोर दे रहे हैं और मैं बीच मझधार में फंसा हूं — न मुझे भोग (रसपान) का मार्ग अच्छा लग रहा है, न अभी ‘कुछ नहीं चाहिए’ में हूं। मार्गदर्शन करें।
अगर आपको जरूरत लगे तो करना; नहीं तो दबाव में आकर किसी और का जीवन बर्बाद मत करना। अगर आपने दबाव में विवाह कर लिया और उसमें आपका भाव भी नहीं है, तो किसी की लाइफ बर्बाद हो जाएगी; उसका भी अपराध का दोष आपको लगेगा। ऐसी गलती न करना। अगर आपको करना है, निभाना है, उसके साथ जीना है, तो विवाह करना, नहीं तो मत करना; नहीं तो उसका परिणाम भी आपको भोगना पड़ेगा। इतना तो भोग नहीं पा रहे हो, अगर कर दिया तो उसका परिणाम कैसे भोगोगे? जीवन में सोच-समझकर आगे बढ़ना। दबाव-संकोच में आकर ऐसा कोई कार्य मत करना, क्योंकि दबाव-संकोच व्यक्ति को हमेशा गिराता है; हमेशा सूझबूझ के साथ आगे बढ़ना। बाकी आपकी मर्जी — आपका जीवन आपके हाथ में है, फैसला आपको करना है। अगर किसी के फोर्स में आकर किया, तो भोगना आपको पड़ेगा।
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