प्रश्नोत्तर P2-0148 · भाग 2
गुरु जी, प्रणाम। गुरु की सेवा करते हुए नाम जप नहीं हो पाता; उस स्थिति में दोनों का फल एक ही है या फर्क है?
कोई बात नहीं, दोनों एक साथ नहीं हो पाते। अगर जरूरत में सेवा कर रहे हो, तो ठीक है; और अगर मान के लिए सेवा कर रहे हो, तो कोई मतलब नहीं है। सेवा जरूरत में कर रहे हो या नहीं, यह देख लेना — जिसकी सेवा कर रहे हो, क्या उसे उसकी आवश्यकता, जरूरत भी है?
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