प्रश्नोत्तर P2-0083 · भाग 2
गुरु जी, मैं आपको दो साल से सुन रहा हूं, सब समझता हूं, ईमानदारी से जीता हूं। लेकिन मेरी एक बुरी आदत है कि बीड़ी पीता हूं और छूटती नहीं। आशीर्वाद दो कि मेरी बीड़ी छूट जाए।
आ जाओ अपनों की कुटिया में, और बीड़ी अभी, आज से, इसी वक्त से छोड़ दो। अगर मुझे गुरु जी बोल रहे हो, तो अब देख लो कि गुरु जी से प्रेम है या बीड़ी से। नहीं तो आप ऐसे ही मुझे गुरु जी बोल रहे हो। अभी से त्याग करो। त्याग ही परम सुख है। तुरंत त्याग करो। अब देखो, आप किसको महत्व देते हो।
सत्संग वीडियो देखेंऐप में खोलें
वीडियो: 17 रात अपनों की कुटिया हरियाणा यमुना तट#योगी · 2026-10-11